Guwahati erupts, असम के लोकप्रिय गायक और सांस्कृतिक आइकन ज़ुबिन गर्ग की मौत के बाद राज्यभर में गुस्से का माहौल है। गुरुवार को यह आक्रोश उस समय और भड़क उठा, जब सैकड़ों लोगों की भीड़ ने गुवाहाटी में उनके मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा के घर का घेराव किया और पुलिस की गाड़ियों पर पथराव कर दिया। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
ज़ुबिन गर्ग की मौत और बढ़ता विवाद
52 वर्षीय ज़ुबिन गर्ग सिंगापुर में एक यॉट पर तैराकी के दौरान डूब गए थे। वे नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में हिस्सा लेने के लिए सिंगापुर गए थे, जो 19 से 21 सितंबर तक होना था। उनकी अचानक हुई मौत ने प्रशंसकों को झकझोर दिया। कई शिकायतों में आयोजन में लापरवाही और कुप्रबंधन का आरोप लगाया गया, जिसके बाद असम पुलिस ने सीआईडी केस दर्ज किया है। इस केस में फेस्टिवल आयोजक श्यामकानु महांता, मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और अन्य पर आपराधिक साजिश, गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही से मौत के मामले लगाए गए हैं।
गुवाहाटी में छापेमारी और भीड़ का आक्रोश

गुरुवार को एसआईटी की टीमें गुवाहाटी स्थित महांता और शर्मा के घर पहुंचीं। महांता का गीतानगर वाला घर खाली मिला, जबकि शर्मा का धिरेनपारा स्थित अपार्टमेंट बंद था। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में दरवाज़ा तोड़कर तलाशी ली गई। जैसे ही यह कार्रवाई शुरू हुई, इमारत के बाहर सैकड़ों लोग जमा हो गए और शर्मा की गिरफ्तारी की मांग करने लगे। पुलिस ने भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन शाम होते-होते गुस्सा भड़क गया। जब एसआईटी के अधिकारी दो गाड़ियों में बाहर निकले, तो भीड़ ने पथराव कर दिया। इसके जवाब में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने लाठीचार्ज कर लोगों को तितर-बितर किया।
आयोजक श्यामकानु महांता का बयान
इस बीच श्यामकानु महांता ने फेसबुक पर एक वीडियो जारी किया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें हजारों धमकी भरे संदेश मिल रहे हैं, इसलिए वे अब तक असम नहीं लौटे हैं। महांता ने कहा, “ज़ुबिन गर्ग को सिंगापुर बुलाना कोई पाप नहीं था। वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर थे। घटना के समय हम आयोजन स्थल से दूर एक मीटिंग में थे।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ “कंगारू कोर्ट” जैसा माहौल बनाया जा रहा है।
सरकार की सख़्त कार्रवाई
बुधवार को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की थी कि श्यामकानु महांता और उनकी संस्थाओं को राज्य में कोई भी कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में उनके आयोजनों को न तो वित्तीय मदद मिलेगी और न ही सरकारी विज्ञापन या प्रायोजन। राज्य सरकार का यह कदम गुस्साई भीड़ को शांत करने का प्रयास माना जा रहा है, हालांकि प्रशंसकों की नाराज़गी अब भी कम होती नहीं दिख रही।
सवालों के घेरे में आयोजन
ज़ुबिन गर्ग की असम और उत्तर-पूर्व भारत में लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। उनकी असमय मौत ने राज्यभर में शोक और गुस्से का माहौल खड़ा कर दिया है। अब जबकि जांच सीआईडी और एसआईटी के हाथों में है, प्रशंसकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोषियों को सज़ा मिलेगी या मामला केवल राजनीतिक और प्रशासनिक बयानबाज़ी तक सिमटकर रह जाएगा।

