47 देशों में बाल शोषण कंटेंट बेचने वाला दंपती दोषी, पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई फांसी

Banda POCSO Case
Banda POCSO Case

Banda POCSO Case: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से जुड़े एक बेहद सनसनीखेज और अमानवीय मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। बच्चों के यौन शोषण के वीडियो बनाकर उन्हें विदेशों में बेचने वाले दंपती—रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती—को बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखा।

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 2010 से 2020 के बीच बांदा, चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों के दर्जनों मासूम बच्चों का यौन शोषण किया और उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाकर अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कजाकिस्तान और बांग्लादेश समेत 47 देशों में भेजे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल गतिविधियों के चलते मामला INTERPOL की नजर में आया, जिसके बाद कार्रवाई तेज हुई।

कैसे खुला मामला?

आरोपी रामभवन चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर तैनात था। केंद्रीय जांच ब्यूरो Central Bureau of Investigation (CBI) ने 18 नवंबर 2020 को उसे गिरफ्तार किया। छापेमारी के दौरान उसके घर से 8 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पेन ड्राइव, आपत्तिजनक सामग्री और लगभग 8 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।

INTERPOL ने डिजिटल साक्ष्य—फोन नंबर, ईमेल आईडी, वीडियो और फोटो—इकट्ठा कर CBI को सौंपे। पेन ड्राइव में बच्चों से जुड़े 34 वीडियो और 679 फोटो पाए गए। इन्हीं सबूतों के आधार पर 31 अक्टूबर 2020 को एफआईआर दर्ज की गई।

डार्क वेब और क्लाउड स्टोरेज का इस्तेमाल

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी दंपती बच्चों के शोषण से जुड़े वीडियो और तस्वीरें डार्क वेब के जरिए बेचते थे। रामभवन जीमेल और गूगल फोटो पर सामग्री स्टोर करता था। इसके अलावा उसने न्यूजीलैंड की क्लाउड स्टोरेज वेबसाइट Mega.nz पर सैकड़ों जीबी का स्पेस खरीद रखा था, जहां वह वीडियो अपलोड करता था।

बताया गया कि कई बार डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर से संदिग्ध गतिविधियों को लेकर चेतावनी भी दी गई थी। अंतरराष्ट्रीय सर्वर और ऑनलाइन लेन-देन की कड़ियों के जरिए ही INTERPOL तक यह मामला पहुंचा।

रिश्तेदारों और किरायेदारों के बच्चों को भी बनाया शिकार

आरोप है कि दंपती ने रिश्तेदारी और पड़ोस का भी भरोसा तोड़ा। रामभवन ने अपनी बहन के बेटे तक का शोषण किया। हमीरपुर में नौकरी के दौरान एक व्यक्ति के छह बच्चों को निशाना बनाया गया। किराए के मकान में रहने के दौरान मकान मालिक के बच्चों को भी फुसलाकर शिकार बनाया गया।

आरोपी बच्चों को मोबाइल फोन, चॉकलेट और घड़ी जैसी चीजों का लालच देता था। खेल-खेल में भरोसा जीतकर वह उन्हें जाल में फंसाता और फिर उनके साथ दरिंदगी करता। उसकी पत्नी दुर्गावती इस अपराध में सक्रिय सहयोगी थी—वह बच्चों को काबू करने, वीडियो बनाने और साक्ष्य छिपाने में मदद करती थी।

रोंगटे खड़े कर देने वाले तथ्य

CBI की जांच में सामने आया कि पीड़ित बच्चों में कुछ की उम्र मात्र 3 साल थी। कई बच्चे शारीरिक रूप से घायल हुए और कुछ को स्थायी स्वास्थ्य समस्याएं हुईं। आरोपी अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क से जुड़ा था और ईमेल के जरिए वीडियो का सौदा करता था।

अदालत में 50 से अधिक बच्चों ने बयान दर्ज कराए, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला बेहद मजबूत हुआ। 18 फरवरी 2026 को दोषी करार दिए जाने के बाद अब अदालत ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

अदालत का फैसला और मुआवजा

बांदा पॉक्सो कोर्ट ने इस अपराध को समाज के लिए अत्यंत घृणित और दुर्लभतम श्रेणी का बताया। अदालत ने आदेश दिया कि दोषी की संपत्ति और घर से बरामद नकदी से प्रत्येक पीड़ित बच्चे के परिवार को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

करीब पांच साल चली कानूनी लड़ाई के बाद यह फैसला आया है। 10 फरवरी 2021 को CBI ने चार्जशीट दाखिल की थी और लंबी सुनवाई के बाद आखिरकार पीड़ित बच्चों को न्याय मिला।

यह मामला न केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती था, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कितनी भयावह स्थितियां पैदा कर सकता है। अदालत का यह सख्त फैसला बाल सुरक्षा के प्रति मजबूत संदेश माना जा रहा है।