Supreme Court का आदेश: कोर टाइगर जोन में सफारी बंद, नए संरक्षण नियम लागू

Supreme Court
Supreme Court

भारत के विभिन्न टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण को मजबूत करने के लिए Supreme Court ने सोमवार को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि टाइगर सफारी केवल गैर-वन भूमि या बफर जोन की क्षतिग्रस्त वनभूमि पर ही चलाई जा सकती है, वह भी तब जब यह क्षेत्र किसी भी बाघ गलियारे का हिस्सा न हो।
यह 80 पन्नों का विस्तृत फैसला अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों से संवेदनशील बाघ आवासों को हो रहे नुकसान को रोकने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।

कोर और क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट में सफारी पर पूर्ण प्रतिबंध

मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई, जस्टिस ए. जी. मसीह और जस्टिस ए. एस. चांदुरकर की पीठ ने जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हुए नियम उल्लंघनों पर एक उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट की समीक्षा की।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कोर जोन और क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट में किसी भी प्रकार की टाइगर सफारी की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अदालत ने जोर देकर कहा कि व्यावसायिक पर्यटन हितों की तुलना में बाघों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

सफारी की अनुमति सिर्फ बचाव एवं पुनर्वास केंद्र से जुड़े होने पर

अदालत ने यह भी निर्धारित किया कि यदि किसी क्षेत्र में सफारी की अनुमति दी जाती है, तो उसे अनिवार्य रूप से “पूर्ण विकसित टाइगर रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर” से जुड़ा होना चाहिए।
यह केंद्र संघर्ष-प्रभावित, घायल या परित्यक्त बाघों के उपचार, देखभाल और पुनर्वास के लिए समर्पित होना चाहिए, ताकि पर्यटन केवल मनोरंजन न होकर संरक्षण प्रयासों का हिस्सा बने।

इको-सेंसिटिव ज़ोन बनाना सभी टाइगर रिजर्व के लिए अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZs) पर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा कि ESZs का निर्माण पर्यावरण मंत्रालय (MoEF&CC) के 23 अप्रैल 2018 के दिशानिर्देशों के अनुरूप किया जाए, जिसके अनुसार ESZ का न्यूनतम क्षेत्र टाइगर रिजर्व के बफर या फ्रिंज एरिया को शामिल करेगा।
इसके साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि देश के सभी टाइगर रिजर्व को एक वर्ष के भीतर आधिकारिक रूप से अधिसूचित ESZ घोषित करना अनिवार्य होगा।

इस निर्णय को देश में बाघ संरक्षण के सबसे कड़े और प्रभावी फैसलों में से एक माना जा रहा है।