एशिया–प्रशांत क्षेत्र में पहले से मौजूद भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सोमवार को एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित फोन बातचीत हुई। व्हाइट हाउस और चीनी अधिकारियों की पुष्टि के बाद यह कॉल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।
शी जिनपिंग का ताइवान पर सख्त संदेश
चीनी सरकारी एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत के दौरान शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि ताइवान का मुख्यभूमि चीन में विलय होना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का एक अहम हिस्सा रहा है।
ताइवान स्वयं को स्वतंत्र लोकतांत्रिक सत्ता के रूप में संचालित करता है, जबकि बीजिंग लगातार इसे अपने क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा मानता है।
व्हाइट हाउस ने कॉल की पुष्टि की, लेकिन विवरण छुपाया
अमेरिकी प्रशासन ने सोमवार सुबह हुई इस कॉल की पुष्टि तो की, लेकिन बातचीत के विषय पर कोई भी विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। इस चुप्पी ने वाशिंगटन और बीजिंग के वर्तमान तनावपूर्ण संबंधों के बीच कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
जापान के हालिया बयान से भी बढ़ा तनाव
यह वार्ता ऐसे समय सामने आई है, जब जापान के प्रधानमंत्री साने ताकाइची के हालिया बयान ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। उन्होंने संकेत दिया था कि अगर चीन ताइवान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो जापान भी हस्तक्षेप कर सकता है। इस टिप्पणी ने बीजिंग को खासा नाराज़ किया है।
द्वितीय विश्व युद्ध की ‘साझा विरासत’ का हवाला
शी जिनपिंग ने बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिका और चीन—जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में एक साथ लड़ाई लड़ी थी—उन्हें उस “विजयी विरासत” को बचाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संदेश वाशिंगटन पर ताइवान मुद्दे पर किसी तरह की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी को याद दिलाने का संकेत हो सकता है।
ट्रेड पर चर्चा, लेकिन कोई ठोस घोषणा नहीं
दोनों नेताओं ने व्यापारिक मुद्दों पर भी बात की, लेकिन चीन की ओर से जारी बयान में न तो अमेरिकी सोयाबीन की खरीद का ज़िक्र किया गया और न ही किसी दूसरे ट्रेड एग्रीमेंट का।

