Hormuz Strait crisis: होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव ने अब वैश्विक कृषि व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। अब तक इस क्षेत्र में तनाव का असर कच्चे तेल, एलपीजी और गैस सप्लाई पर देखा जा रहा था, लेकिन अब इसका सीधा असर खाद (उर्वरक) की आपूर्ति पर पड़ रहा है। इससे खेती, फसल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
Food and Agriculture Organization (FAO) के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र खाद उत्पादन और निर्यात का बड़ा केंद्र है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अस्थिरता पूरी दुनिया के किसानों और खाद्य कीमतों को प्रभावित करती है। आइए 6 अहम पॉइंट्स में समझते हैं पूरा मामला:
1. दुनिया के लिए जरूरी खाड़ी की खाद
खाड़ी देशों की भूमिका वैश्विक कृषि में बेहद अहम है। यहां प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक गैस उपलब्ध है, जिससे ये देश कम लागत में नाइट्रोजन और फॉस्फेट खाद का उत्पादन करते हैं। Qatar, Saudi Arabia और Iran जैसे देश दुनिया के प्रमुख उर्वरक सप्लायर हैं। होर्मुज स्ट्रेट में बाधा आने से इनकी सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है।
2. होर्मुज स्ट्रेट बना ‘चोकपॉइंट’
Strait of Hormuz केवल तेल ही नहीं, बल्कि खाद सप्लाई का भी अहम मार्ग है। दुनिया की करीब 30% उर्वरक सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है, जो सालाना लगभग 16 मिलियन टन के बराबर है। इस रास्ते के बाधित होने का मतलब है कई देशों तक खाद की आपूर्ति रुकना।
3. फारस की खाड़ी का अहम योगदान
Persian Gulf खाद उत्पादन का बड़ा केंद्र है। यहां स्थित कई देश उर्वरक निर्माण के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, कतर की कंपनी QAFCO अकेले दुनिया के लगभग 14% यूरिया उत्पादन में योगदान देती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का वैश्विक असर होना तय है।
4. युद्ध से उत्पादन और सप्लाई बाधित
ईरान और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते संघर्ष ने उत्पादन और लॉजिस्टिक्स दोनों को प्रभावित किया है। रिफाइनरियों और उत्पादन इकाइयों पर हमलों के खतरे के कारण कंपनियां उत्पादन घटा रही हैं या बंद कर रही हैं। इससे लाखों टन खाद बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है, जिससे संकट और गहराता जा रहा है।
5. दुनिया भर में बढ़े खाद के दाम
सप्लाई में कमी और गैस की बढ़ती कीमतों के कारण उर्वरकों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। कुछ ही हफ्तों में कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है। उदाहरण के तौर पर, मिस्र में यूरिया के दाम करीब 28% तक बढ़ चुके हैं। यह स्थिति वैश्विक महंगाई को और बढ़ा सकती है।
6. खाद संकट से बढ़ेगा खाद्य संकट
खाद की कमी का सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा। इससे अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे खासतौर पर कम आय वाले देशों और लोगों पर भारी असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो भुखमरी और आर्थिक संकट का खतरा बढ़ सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
यह संकट सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल रहा है। उर्वरकों की कीमतों में 15–20% तक की बढ़ोतरी पहले ही दर्ज की जा चुकी है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा और महंगाई दोनों बड़ी चुनौतियां बन सकती हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक सप्लाई चेन कितनी संवेदनशील है। एक क्षेत्र में संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ऐसे में देशों को वैकल्पिक सप्लाई चेन और स्थानीय उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना होगा, ताकि भविष्य में ऐसे संकट से बचा जा सके।

