भारत में अब जलवायु परिवर्तन का असर आम की खेती पर साफ नजर आने लगा है। मौसम के बदलते मिजाज, तापमान में उतार-चढ़ाव और अनियमित सर्दी के कारण आम के पेड़ों में फूल (मंजर) आने में देरी हो रही है। इसका सीधा असर न केवल उत्पादन पर पड़ रहा है, बल्कि आम की मिठास और गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
आम, जिसे ‘फलों का राजा’ कहा जाता है, आज एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के प्लांट पैथोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, हाल के निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ है कि आम के पेड़ बदलते पर्यावरण के साथ संघर्ष कर रहे हैं।
मंजर में देरी और कीटों का बढ़ता खतरा
इस वर्ष आम के पेड़ों में मंजर आने में लगभग 7 से 10 दिन की देरी देखी गई है। इसका मुख्य कारण फरवरी में असामान्य रूप से कम तापमान और लंबी सर्दी रहा है। आम के अच्छे फूल आने के लिए रात का तापमान 12 से 15 डिग्री सेल्सियस और दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री होना चाहिए, लेकिन इस बार यह संतुलन बिगड़ गया।
देरी से आए मंजर अधिक नाजुक होते हैं और उन पर कीटों का खतरा भी ज्यादा रहता है। खासतौर पर ‘मिली बग’ नामक कीट तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है। यह कीड़ा मंजर और छोटे फलों (टिकोला) का रस चूस लेता है, जिससे फल समय से पहले गिर जाते हैं। इसके अलावा, यह एक चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है, जिस पर काली फफूंद (सूटी मोल्ड) जम जाती है, जिससे पेड़ों की वृद्धि प्रभावित होती है।
पुराने और नए पेड़ों पर अलग असर
वैज्ञानिकों के अनुसार, पेड़ों की उम्र भी जलवायु परिवर्तन के असर को तय करती है। 15 साल से कम उम्र के पेड़ बदलते मौसम को बेहतर तरीके से झेल लेते हैं और उनमें फलन भी बेहतर होता है। वहीं, 15 साल से ज्यादा पुराने पेड़ तापमान में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जिससे उनमें मंजर आने में देरी और उत्पादन में कमी देखने को मिलती है।
इसका मतलब है कि किसानों को पुराने बागों के लिए विशेष देखभाल और आधुनिक तकनीकों की जरूरत है।
भविष्य में और बढ़ेगा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 10–15 वर्षों में तापमान में 1 से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर परागण (pollination) पर पड़ेगा, क्योंकि ज्यादा तापमान में परागण करने वाले कीट कम सक्रिय हो जाते हैं। इससे फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और उत्पादन घट सकता है।
इस चुनौती से निपटने के लिए अब ऐसी आम की किस्मों को बढ़ावा देने की जरूरत है जो ज्यादा गर्मी सहन कर सकें।
बचाव के 5 असरदार उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, “क्लाइमेट स्मार्ट” खेती अपनाकर किसान इस समस्या से काफी हद तक बच सकते हैं:
1. कीट नियंत्रण:
मिली बग से बचाव के लिए पेड़ों के तनों पर प्लास्टिक की पट्टी बांधें, जिससे कीड़े ऊपर न चढ़ सकें।
2. संतुलित पोषण:
NPK के साथ बोरॉन और जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग करें, इससे फल मजबूत और स्वस्थ बनते हैं।
3. ड्रिप सिंचाई:
ड्रिप सिस्टम से सिंचाई करने पर पानी की बचत होती है और मिट्टी में नमी संतुलित रहती है।
4. मल्चिंग तकनीक:
मिट्टी को ढककर रखने से नमी बनी रहती है और जड़ों को तापमान के असर से बचाया जा सकता है।
5. डिजिटल तकनीक का उपयोग:
मौसम की जानकारी देने वाले ऐप्स और डिजिटल फार्मिंग टूल्स का इस्तेमाल करें, ताकि समय रहते सही निर्णय लिए जा सकें।
क्या करें और क्या न करें
क्या करें (Do’s):
- रोजाना बाग की जांच करें
- संतुलित खाद का उपयोग करें
- विशेषज्ञों की सलाह लें
- सूखी टहनियों की छंटाई करें
क्या न करें (Don’ts):
- मंजर के समय तेज रसायनों का छिड़काव न करें
- अधिक सिंचाई से बचें
- पेड़ों को बहुत पास-पास न लगाएं
खेती में बदलाव का समय
आज आम की खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान बन चुकी है। यदि किसान बदलते मौसम को समझकर आधुनिक तकनीकों को अपनाते हैं, तो वे इस संकट को अवसर में बदल सकते हैं।
समय रहते सही कदम उठाना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी आम की वही मिठास और गुणवत्ता का आनंद ले सकें।

