Zelensky on Iran Protests: ईरान में क्रांति का मौका, दुनिया न गंवाए

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Zelensky on Iran Protests: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक सख्त और दूरगामी चेतावनी दी है। उन्होंने इन घटनाओं को केवल आंतरिक असंतोष नहीं, बल्कि एक “क्रांति” करार देते हुए कहा कि अगर दुनिया ने इस मौके को गंवा दिया, तो न सिर्फ ईरान बल्कि वैश्विक सत्ता संतुलन पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। जेलेंस्की का कहना है कि ईरान की सड़कों पर दिख रहा जनविद्रोह तानाशाही के खिलाफ स्पष्ट संकेत है और यह लहर मध्य पूर्व की सीमाओं से कहीं आगे तक जाएगी।

जेलेंस्की ने ईरान की मौजूदा स्थिति को सीधे यूक्रेन युद्ध से जोड़ते हुए तर्क दिया कि यदि ईरानी शासन कमजोर पड़ता है या सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ता है, तो इससे रूस की रणनीतिक स्थिति कमजोर होगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा,
“जो कुछ इस वक्त ईरान में हो रहा है, वह वास्तव में एक क्रांति है। यह संकेत है कि रूस के लिए आगे चीजें आसान नहीं होंगी।”
उनके अनुसार, ईरान रूस का एक अहम सहयोगी रहा है और वहां होने वाला कोई भी बड़ा राजनीतिक बदलाव यूक्रेन युद्ध की दिशा को प्रभावित कर सकता है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया का हर संवेदनशील नागरिक चाहता है कि ईरान की जनता उस शासन से आज़ाद हो, जिसने न केवल अपने ही लोगों पर दमन किया है, बल्कि अन्य देशों—खासतौर पर यूक्रेन—के लिए भी हिंसा और अस्थिरता को बढ़ावा दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नेताओं, देशों और संगठनों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक क्षण को पहचानें और ईरानी जनता के समर्थन में आगे आएं

जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन पर हमलों में ईरान-निर्मित ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। यूक्रेन पहले भी कई बार दावा कर चुका है कि ईरान ने रूस को ड्रोन और सैन्य तकनीक उपलब्ध कराई है, जिससे युद्ध लंबा खिंचा है और नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। इस पृष्ठभूमि में, जेलेंस्की का मानना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना रूस के लिए रणनीतिक झटका साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि ईरान में मौजूदा सत्ता कमजोर होती है, तो रूस को अपने एक महत्वपूर्ण सैन्य और तकनीकी सहयोगी से हाथ धोना पड़ सकता है। इससे न केवल यूक्रेन युद्ध की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में भी नए समीकरण बन सकते हैं। यही वजह है कि जेलेंस्की इस आंदोलन को एक वैश्विक अवसर के रूप में देख रहे हैं, न कि केवल एक क्षेत्रीय संकट के रूप में।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह तटस्थ बने रहने के बजाय सक्रिय भूमिका निभाए। “यह बेहद ज़रूरी है कि दुनिया इस मौके को न गंवाए, जब बदलाव संभव है,” जेलेंस्की ने कहा। उनके अनुसार, हर वह क्षण जब तानाशाही कमजोर पड़ती है, लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक अवसर लेकर आता है—और ऐसे अवसर इतिहास में बार-बार नहीं मिलते।

जेलेंस्की के बयान के बाद ईरान में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर वैश्विक बहस और तेज हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह आंदोलन केवल ईरान का आंतरिक संकट है, या फिर वह मोड़ है जो मध्य पूर्व से लेकर यूरोप तक की राजनीति को नया आकार दे सकता है। फिलहाल, जेलेंस्की की चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि यूक्रेन इस घटनाक्रम को केवल दूर से देखने के पक्ष में नहीं है, बल्कि इसे वैश्विक बदलाव की कड़ी के रूप में देख रहा है।