New START Treaty: अमेरिका–रूस के बीच नई हथियार होड़ का खतरा गहराया

New START Treaty
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New START Treaty: अमेरिका और रूस के बीच आखिरी बची परमाणु हथियार नियंत्रण संधि न्यू START के समाप्त होते ही वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर गई है। गुरुवार को इस संधि की वैधता खत्म होने के साथ ही दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों पर लगी औपचारिक पाबंदियां हट गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल अमेरिका और रूस के बीच अविश्वास बढ़ेगा, बल्कि एक नई और खतरनाक परमाणु हथियार दौड़ की आशंका भी तेज हो जाएगी।

न्यू START संधि पर वर्ष 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का उद्देश्य शीत युद्ध के बाद परमाणु हथियारों की संख्या को नियंत्रित करना और रणनीतिक स्थिरता बनाए रखना था। संधि के तहत दोनों देशों को अधिकतम 1,550 तैनात परमाणु वारहेड्स और 700 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों, पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली मिसाइलों तथा रणनीतिक बमवर्षकों तक सीमित रखा गया था।

यह संधि मूल रूप से 2021 में समाप्त होनी थी, लेकिन वैश्विक सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए इसे पांच वर्षों के लिए बढ़ाया गया। हालांकि, इसके बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता गया। यूक्रेन युद्ध, NATO का विस्तार और एक-दूसरे पर लगाए गए प्रतिबंधों ने हालात को और जटिल बना दिया।

न्यू START की एक अहम विशेषता ऑन-साइट निरीक्षण की व्यवस्था थी, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण कर सकते थे। इससे पारदर्शिता बनी रहती थी और गलतफहमियों की गुंजाइश कम होती थी। लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में ये निरीक्षण रोक दिए गए और बाद में राजनीतिक तनाव के चलते इन्हें दोबारा शुरू नहीं किया जा सका।

फरवरी 2023 में रूस ने इस संधि में अपनी भागीदारी निलंबित करने की घोषणा कर दी थी। मॉस्को का तर्क था कि उस समय अमेरिका और NATO के कई नेताओं ने खुले तौर पर रूस की रणनीतिक हार को अपना लक्ष्य बताया, ऐसे में अमेरिकी निरीक्षकों को रूसी सैन्य ठिकानों तक पहुंच देना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। हालांकि, रूस ने तब यह भी स्पष्ट किया था कि वह संधि से पूरी तरह बाहर नहीं निकल रहा है और सीमाओं का स्वेच्छा से पालन करता रहेगा।

पिछले वर्ष राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया था कि यदि अमेरिका भी सकारात्मक रुख दिखाए, तो रूस एक वर्ष के लिए न्यू START की सीमाओं का पालन करने को तैयार है, ताकि नई संधि पर बातचीत का रास्ता खुल सके। पुतिन ने चेतावनी दी थी कि इस समझौते के खत्म होने से वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है और परमाणु हथियारों के प्रसार को बढ़ावा मिल सकता है।

रूसी राष्ट्रपति के करीबी सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि रूस मौजूदा सुरक्षा हालात को ध्यान में रखते हुए “संतुलित और जिम्मेदार तरीके” से कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुतिन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ इस संधि की समाप्ति और इसके वैश्विक प्रभावों पर चर्चा की है। वहीं, रूसी विदेश मंत्रालय का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में न्यू START की कोई कानूनी बाध्यता नहीं रही और अब दोनों देश स्वतंत्र रूप से अपने अगले कदम तय कर सकते हैं।

अमेरिका की ओर से भी अभी तक किसी नए समझौते को लेकर स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि जल्द ही कोई नया परमाणु हथियार नियंत्रण ढांचा तैयार नहीं हुआ, तो यह स्थिति न केवल अमेरिका और रूस के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं के बीच, न्यू START का अंत वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।