US attack on Venezuela: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के लिए अमेरिका द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह कदम किसी संप्रभु देश के खिलाफ युद्ध जैसा आक्रामक हस्तक्षेप माना जाएगा। कई अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों का कहना है कि किसी राष्ट्राध्यक्ष को सैन्य बल के सहारे दूसरे देश से पकड़ना संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के खिलाफ हो सकता है।
इसी बीच, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने साफ कहा कि इस पूरे ऑपरेशन में ब्रिटेन की कोई भागीदारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि फिलहाल सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता वेनेजुएला में रह रहे करीब 500 ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
स्टारमर के अनुसार, लंदन सरकार कराकस स्थित ब्रिटिश दूतावास के संपर्क में है और नागरिकों को लगातार जरूरी दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की पूरी जांच आवश्यक है। उनके शब्दों में, “पहले हमें सच्चाई समझनी होगी, तभी आगे की रणनीति तय होगी।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे जल्द ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित अन्य सहयोगी देशों के नेताओं से बातचीत करेंगे, हालांकि अभी तक ट्रंप से उनकी सीधी बात नहीं हुई है।
🇬🇧🇻🇪 UK PM STARMER: “WE WERE NOT INVOLVED IN THE VENEZUELA OP”
UK PM Starmer says Britain had zero involvement in the U.S. military operation that removed Maduro from power in Venezuela.
While calling for calm and fact-finding, he made clear that London is focusing on… https://t.co/vCvQ0h8Qm6 pic.twitter.com/ZzXYIzHeFz
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) January 3, 2026
ब्रिटिश सरकार फिलहाल डैमेज-कंट्रोल में जुटी है और इस बात को लेकर चिंतित है कि हालात और अधिक अस्थिर न हो जाएं। लंदन की कोशिश है कि क्षेत्रीय तनाव न बढ़े और संकट सीमित रहे। दूसरी ओर, अमेरिका का रुख बिल्कुल अलग है। ट्रंप प्रशासन मादुरो को वेनेजुएला का वैध राष्ट्रपति नहीं मानता और 2024 के विवादित चुनावों के बाद एडमुंडो गोंजालेज़ उरुतिया को ‘राष्ट्रपति-निर्वाचित’ मानता है।
वाशिंगटन का दावा रहा है कि मादुरो “नार्को-टेररिस्ट” गतिविधियों में शामिल हैं। 2020 में अमेरिकी अदालत में उन पर ड्रग तस्करी और कोलंबियाई गुरिल्ला संगठनों से संबंधों के आरोप लगे थे। उनकी गिरफ्तारी पर अमेरिका ने 50 मिलियन डॉलर का इनाम भी घोषित कर रखा था। अब कार्रवाई के बाद रूस और ईरान ने अमेरिका पर अवैध सैन्य आक्रमण का आरोप लगाया है, जबकि यूरोपीय संघ ने संयम बरतने की अपील की और कहा कि मादुरो की वैधता पर गंभीर प्रश्न मौजूद हैं।
कोलंबिया ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। कानूनी व्याख्याएँ चाहे जो हों, फिलहाल वास्तविकता यही है कि निकोलस मादुरो अमेरिकी हिरासत में हैं — और विश्व राजनीति एक बार फिर गहरे विभाजन का सामना कर रही है।

