Weather Alert: ‘Super El Nino’ का खतरा, वैज्ञानिकों ने दी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चेतावनी

Super El Nino
Super El Nino

Weather Report Super El Nino: मार्च का महीना अभी आधा ही बीता है, लेकिन देश के कई हिस्सों में तापमान पहले ही मई-जून जैसी भीषण गर्मी का एहसास कराने लगा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में पारा तेजी से चढ़ रहा है और कई जगहों पर यह 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र और राजस्थान के कुछ इलाकों में तो अभी से लू जैसे हालात बनने लगे हैं।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले महीनों में गर्मी और भी ज्यादा तीखी हो सकती है। वैश्विक मौसम एजेंसियों और वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल ‘सुपर एल नीनो’ (Super El Niño) बनने की आशंका बढ़ रही है, जो दुनिया भर के मौसम पैटर्न को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

वैश्विक स्तर पर मौसम की निगरानी करने वाली संस्थाओं के मुताबिक, प्रशांत महासागर में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। World Meteorological Organization (WMO) और यूरोप के कई जलवायु विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल सुपर एल नीनो बनने की लगभग 60 प्रतिशत संभावना है। अगर ऐसा हुआ तो 2026 और 2027 दुनिया के इतिहास के सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो सकते हैं।

क्या होता है एल नीनो?

एल नीनो दरअसल एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के सतही पानी के असामान्य रूप से गर्म हो जाने पर पैदा होती है। सामान्य परिस्थितियों में समुद्र का तापमान एक निश्चित सीमा में रहता है, लेकिन जब यह औसत से लगभग 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है, तब वैश्विक मौसम प्रणाली पर इसका बड़ा असर पड़ता है।

इस स्थिति में महासागर के भीतर जमा गर्मी वातावरण में फैलने लगती है, जिससे पूरी दुनिया के तापमान में बढ़ोतरी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी पड़ती है, जबकि कुछ जगहों पर भारी बारिश या सूखे जैसी चरम मौसम स्थितियां देखने को मिलती हैं।

जलवायु वैज्ञानिक डेनियल स्वेन और एंडी हेजल्टन के अनुसार, एल नीनो के दौरान महासागर के अंदर फंसी हुई गर्मी अचानक सतह पर आ जाती है। यह अतिरिक्त गर्मी वातावरण में फैलकर वैश्विक तापमान को और बढ़ा देती है। यही वजह है कि एल नीनो के साल अक्सर दुनिया के सबसे गर्म सालों में गिने जाते हैं।

पहले भी दिखा चुका है असर

इतिहास बताता है कि जब भी शक्तिशाली एल नीनो विकसित हुआ है, तब दुनिया को असामान्य मौसम का सामना करना पड़ा है। 1982–83 और 2015–16 के एल नीनो एपिसोड को अब तक के सबसे प्रभावशाली उदाहरणों में गिना जाता है। उस समय दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी दर्ज की गई थी।

विशेषज्ञों को डर है कि इस बार बनने वाला संभावित ‘सुपर एल नीनो’ उससे भी ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है। अगर यह पूरी ताकत से विकसित हुआ, तो कई देशों में तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश एल नीनो के प्रभाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। आमतौर पर एल नीनो के दौरान भारत में गर्मी अधिक तीव्र होती है और मानसून भी कमजोर पड़ सकता है। इससे कई राज्यों में सूखे की स्थिति पैदा होने का खतरा रहता है।

इसके अलावा तापमान में बढ़ोतरी से बिजली की मांग बढ़ सकती है, जल संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है और कृषि क्षेत्र पर भी इसका असर पड़ सकता है। किसानों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि बारिश के पैटर्न में बदलाव से फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।

ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ा खतरा

वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस बार एल नीनो ऐसी दुनिया में बन रहा है, जो पहले से ही ग्लोबल वार्मिंग की वजह से काफी गर्म हो चुकी है। वातावरण में बढ़ती ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी के तापमान को लगातार बढ़ा रही हैं।

मौसम विज्ञानी एरिक वेब का कहना है कि आज की जलवायु प्रणाली पहले की तुलना में कहीं ज्यादा गर्म हो चुकी है। इसका मतलब यह है कि एल नीनो से निकलने वाली अतिरिक्त गर्मी को पृथ्वी का वातावरण पहले की तरह आसानी से अवशोषित नहीं कर पा रहा है।

यही कारण है कि अगर सुपर एल नीनो विकसित होता है तो उसका असर पहले से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता है।

क्या 2027 होगा सबसे गर्म साल?

हालांकि वैज्ञानिक अभी यह निश्चित तौर पर नहीं कह सकते कि 2026 सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ देगा या नहीं, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 दुनिया का अब तक का सबसे गर्म साल बन सकता है

अगर ऐसा होता है तो दुनिया को न सिर्फ भीषण गर्मी, बल्कि कई अन्य चरम मौसम घटनाओं का भी सामना करना पड़ सकता है। कहीं भीषण सूखा पड़ेगा तो कहीं अचानक बाढ़ जैसी स्थितियां बन सकती हैं। इसके अलावा प्रशांत महासागर में शक्तिशाली चक्रवातों की संख्या भी बढ़ सकती है।

प्रकृति का चेतावनी संकेत

वैज्ञानिक इस पूरी स्थिति को प्रकृति की चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि अगर दुनिया ने जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए गंभीर कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दशकों में ऐसी घटनाएं और भी ज्यादा आम हो सकती हैं।

फिलहाल विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारों और लोगों को आने वाले महीनों के लिए तैयार रहना चाहिए। गर्मी से बचाव, पानी का सही उपयोग और पर्यावरण संरक्षण जैसे कदम भविष्य में बड़े संकट को टालने में मदद कर सकते हैं।