LPG Crisis Impact in India: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब धीरे-धीरे भारत के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने खाड़ी क्षेत्र में स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। इस संघर्ष का सबसे बड़ा प्रभाव समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ा है, खासकर Hormuz Strait पर, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है।
इस समुद्री रास्ते में बाधा आने से भारत में LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। इसका सीधा असर छोटे व्यापारियों, होटल-रेस्टोरेंट और सड़क किनारे ठेले लगाने वाले लोगों पर पड़ रहा है।
आयात पर भारी निर्भरता
भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। आंकड़ों के मुताबिक देश की कुल खपत का 60 प्रतिशत से अधिक LPG विदेशों से आती है। इसमें भी सबसे अहम बात यह है कि इस आयात का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा Hormuz Strait के रास्ते भारत पहुंचता है।
लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण यह मार्ग प्रभावित हुआ है, जिससे गैस की आपूर्ति में रुकावटें आने लगी हैं। भारत में हर साल करीब 31 मिलियन टन LPG की खपत होती है, जिसमें से बड़ी मात्रा घरेलू उपयोग के लिए आरक्षित रहती है। ऐसे में सप्लाई में थोड़ी सी भी कमी पूरे बाजार को प्रभावित कर सकती है।
कमर्शियल सिलेंडर की कमी
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता देने का फैसला लिया है। इसके तहत कई जगहों पर कमर्शियल LPG सिलेंडर की बुकिंग सीमित या अस्थायी रूप से रोकी गई है।
हालांकि इस कदम का सीधा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। चाय की दुकानें, ढाबे, स्ट्रीट फूड विक्रेता और छोटे होटल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
दिल्ली और नोएडा जैसे शहरों से खबरें सामने आई हैं कि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की भारी कमी हो गई है। पहले जो सिलेंडर लगभग 2000 रुपये के आसपास मिल जाता था, अब उसकी कीमत ब्लैक मार्केट में 2500 से 2800 रुपये तक पहुंच गई है।
कालाबाजारी की शिकायतें
गैस की कमी के बीच कई इलाकों में कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। दुकानदारों का कहना है कि सिलेंडर पाने के लिए उन्हें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
कुछ जगहों पर तो स्थिति इतनी खराब हो गई है कि छोटे रेहड़ी-पटरी वाले गैस न मिलने के कारण अपना काम अस्थायी रूप से बंद करने को मजबूर हो गए हैं। इससे उनकी रोज़मर्रा की आय पर भी बड़ा असर पड़ा है।
आम लोगों की जेब पर असर
LPG की कीमतों और उपलब्धता में आई इस समस्या का सीधा असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है।
जो कटिंग चाय पहले 7 से 10 रुपये में मिलती थी, अब उसकी कीमत बढ़कर 15 से 20 रुपये तक पहुंच गई है।
इसी तरह स्ट्रीट फूड के दामों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
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पूरी-सब्जी की प्लेट पर करीब 5 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।
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गोलगप्पे की प्लेट में अब पहले के मुकाबले कम पीस दिए जा रहे हैं।
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कई छोटे ढाबों और फूड स्टॉल्स ने अपने मेन्यू में बदलाव कर दिया है।
रेस्टोरेंट्स ने बदला मेन्यू
बड़े होटल और रेस्टोरेंट भी इस संकट से अछूते नहीं हैं। गैस महंगी होने के कारण कई जगहों पर मेन्यू में बदलाव किया जा रहा है।
कुछ रेस्टोरेंट्स ने महंगी डिशेज जैसे मटर पनीर को अस्थायी रूप से मेन्यू से हटाना शुरू कर दिया है या उनकी कीमत बढ़ा दी गई है। इसका उद्देश्य लागत को नियंत्रित करना और कारोबार को जारी रखना है।
इलेक्ट्रिक उपकरणों की ओर रुख
LPG संकट को देखते हुए कई होटल और रेस्टोरेंट मालिक अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख कर रहे हैं।
पारंपरिक गैस सिलेंडर की जगह अब इलेक्ट्रिक तंदूर, इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक स्टोव जैसे उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे गैस पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई पर इसका असर और गहरा हो सकता है। फिलहाल छोटे व्यापारियों और आम लोगों को इस संकट के कारण बढ़ती लागत और महंगे खाने-पीने का सामना करना पड़ रहा है।

