Russia Ukraine Attack: यूक्रेन और रूस के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन पर अब तक के सबसे बड़े और तीव्र हवाई हमलों में से एक को अंजाम दिया है। मंगलवार रात किए गए इस हमले में रूस ने 450 से अधिक ड्रोन और 70 से ज्यादा तरह-तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इस हमले का मुख्य निशाना यूक्रेन का ऊर्जा बुनियादी ढांचा रहा, जिसमें बिजली संयंत्र, पावर ग्रिड और अन्य अहम सुविधाएं शामिल हैं। इसके चलते देश के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई और कड़ाके की ठंड के बीच आम नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ गईं।
यह हमला ऐसे समय पर हुआ है, जब संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में बुधवार और गुरुवार को रूस–यूक्रेन शांति वार्ता प्रस्तावित है। इस बैठक में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होने वाले हैं। इन वार्ताओं का उद्देश्य फरवरी 2022 से जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में कोई ठोस रास्ता निकालना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने लंबे समय से इस संघर्ष को बातचीत के जरिए खत्म करने पर जोर दिया है।
कई शहरों में अंधेरा और ठंड की मार
यूक्रेनी ऊर्जा मंत्री के अनुसार, रातभर चले हवाई हमलों में राजधानी कीव, दूसरे सबसे बड़े शहर खार्किव समेत देश के आठ अलग-अलग क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के कारण बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति बाधित हुई। कई इलाकों में तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिर गया है, जिससे बिना बिजली के लोगों का जीवन बेहद कठिन हो गया है। हीटिंग सिस्टम ठप होने के कारण बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों में कम से कम नौ लोग घायल हुए हैं, जबकि कई रिहायशी इलाकों में भी नुकसान की खबरें हैं। आपात सेवाएं लगातार क्षतिग्रस्त इलाकों में मरम्मत और राहत कार्य में जुटी हुई हैं।
जेलेंस्की का आरोप: ठंड को हथियार बना रहा है रूस
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि रूस जानबूझकर सर्दियों के मौसम का फायदा उठा रहा है और आम नागरिकों को डराने की रणनीति अपना रहा है। जेलेंस्की के अनुसार, “रूस की यह रणनीति साफ है—भीषण ठंड में ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाकर लोगों के जीवन को असहनीय बनाना। इस बार रिकॉर्ड संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है।”
उन्होंने सहयोगी देशों से यूक्रेन को और अधिक उन्नत वायु रक्षा प्रणालियां देने की अपील की, ताकि ऐसे हमलों को रोका जा सके। साथ ही उन्होंने रूस पर अधिकतम अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाए रखने की भी मांग की, जिससे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाया जा सके।
नाटो और पश्चिमी देशों की चिंता
इन हमलों के बाद नाटो महासचिव ने कीव का दौरा किया और यूक्रेन के नेतृत्व से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि शांति वार्ता से ठीक पहले इस तरह के हमले रूस के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उनके अनुसार, यह शांति प्रयासों के लिए “बेहद नकारात्मक और चिंताजनक संकेत” है।
पश्चिमी देशों का मानना है कि वार्ता से पहले सैन्य दबाव बढ़ाकर रूस बातचीत की मेज पर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। हालांकि, इस रणनीति से युद्ध खत्म होने की संभावनाएं और जटिल हो सकती हैं।
सबसे बड़ा विवाद: कब्जे वाला इलाका
रूस और यूक्रेन के बीच शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा अब भी वही है—रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों का मुद्दा। यूक्रेन अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है, जबकि रूस इन क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है। अबू धाबी में होने वाली वार्ता में इसी मुद्दे पर समाधान तलाशना सबसे बड़ा लक्ष्य होगा, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए किसी व्यापक समझौते की संभावना फिलहाल कम ही नजर आ रही है।
शांति वार्ता से ठीक पहले किया गया यह व्यापक हमला दिखाता है कि यूक्रेन संकट अभी भी बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है। एक ओर बातचीत के जरिए समाधान की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर मैदान में सैन्य कार्रवाइयां तेज होती जा रही हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि अबू धाबी की वार्ता इस लंबे युद्ध को खत्म करने की दिशा में कोई उम्मीद जगा पाएगी या नहीं।

