चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद (QUAD) — जिसमें अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं — ने चीन की राजधानी बीजिंग में एक अनोखी और बेहद चर्चा में रहने वाली बैठक आयोजित की। यह मुलाकात बीजिंग स्थित अमेरिकी दूतावास में हुई, और खास बात यह रही कि इसे न केवल सार्वजनिक किया गया, बल्कि रणनीतिक तौर पर एक स्पष्ट संकेत के रूप में भी देखा गया। क्षेत्रीय कूटनीति के जानकारों के अनुसार, यह बैठक इस बात का संकेत है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था और स्थिरता के मुद्दे पर चारों देश एकजुट दिखाई देना चाहते हैं।
अमेरिका के राजदूत डेविड परड्यू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बैठक की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि क्वाड “स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत” के लिए एक सकारात्मक और निर्माणात्मक शक्ति है। उनके अनुसार, चारों देशों के बीच संबंध न केवल स्थिर हैं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से और भी गहरे होते जा रहे हैं। बैठक में भारत के राजदूत प्रदीप कुमार रावत भी मौजूद थे, हालांकि भारतीय दूतावास की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
क्वाड के गठन के बाद से ही चीन इसका आलोचक रहा है। बीजिंग बार-बार यह आरोप लगाता रहा है कि यह व्यवस्था “गुट राजनीति” को बढ़ावा देती है और क्षेत्रीय संतुलन के लिए चुनौती बन सकती है। इसके बावजूद, बीजिंग में हुई इस खुली बैठक को कई विश्लेषक उन धारणाओं के जवाब के रूप में देखते हैं—जहाँ चारों देश यह दिखाना चाहते हैं कि उनका सहयोग किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए है।
हालांकि, इस बैठक पर चीन की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पहले, चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा था कि देशों के बीच सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाकर नहीं होना चाहिए। उनका तर्क रहा है कि गुट-आधारित राजनीति क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकती है। फिर भी, कूटनीति के जानकार मानते हैं कि बीजिंग में क्वाड राजदूतों की यह संयुक्त मौजूदगी स्वयं में एक संदेश है — कि हिंद-प्रशांत में शक्ति संतुलन अब केवल आर्थिक या सैन्य मुद्दा नहीं, बल्कि नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का प्रश्न बन चुका है।
बैठक के जरिए क्वाड देशों ने यह संकेत भी दिया कि संवाद और साझेदारी उनके सहयोग का मुख्य आधार है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, आपदा-प्रबंधन, तकनीकी सहयोग और संवेदनशील आपूर्ति-श्रृंखलाओं जैसे मुद्दों पर संयुक्त कदम उठाना भविष्य की प्राथमिकताएँ मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन भले ही क्वाड पर संदेह जताता रहा हो, लेकिन क्षेत्र के कई देश इसे संतुलन और पारदर्शिता बढ़ाने वाले मंच के रूप में देखने लगे हैं।
कुल मिलाकर, बीजिंग में आयोजित यह दुर्लभ और खुली बैठक इस बात की पुष्टि करती है कि क्वाड केवल एक अनौपचारिक समूह नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच बनता जा रहा है जो संवाद, सहयोग और साझा सुरक्षा चिंताओं को लेकर दीर्घकालिक भूमिका निभाना चाहता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पहल पर चीन की औपचारिक प्रतिक्रिया क्या होती है और क्षेत्रीय कूटनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

