Operation Sindoor: राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन केवल एक ऐतिहासिक अध्याय नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक बड़ा सामाजिक और आध्यात्मिक आंदोलन था। अयोध्या के राम मंदिर परिसर स्थित अन्नपूर्णा मंदिर में धर्म ध्वजा फहराने के बाद उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित किया और विशेष प्रार्थनाओं में हिस्सा लिया।
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने यह कार्रवाई भगवान राम के आदर्शों से प्रेरित होकर की। उनके अनुसार, भगवान राम विनम्र और दयालु हैं, लेकिन अन्याय और अधर्म के सामने वे कठोर रूप धारण करते हैं — और ऑपरेशन के दौरान भारत ने भी वही मर्यादा अपनाई। इस सैन्य कार्रवाई को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब के रूप में देखा गया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन का उद्देश्य किसी देश को निशाना बनाना नहीं, बल्कि आतंकवाद और उसे आश्रय देने वाली ताकतों को कड़ा संदेश देना था। उन्होंने कहा कि जैसे भगवान राम का लक्ष्य रावण का अंत करना नहीं, बल्कि अधर्म का अंत करना था — उसी प्रकार इस कार्रवाई का मकसद भी आतंक के ढाँचे को कमजोर करना था।
राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भगवान राम केवल धार्मिक ग्रंथों का पात्र नहीं, बल्कि एक जीवंत नैतिक शक्ति हैं, जो कठिन परिस्थितियों में समाज और राष्ट्र को मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि राम मंदिर आंदोलन ने लंबे संघर्ष, धैर्य और आस्था के आधार पर अपना रास्ता बनाया और अंततः इतिहास की दिशा बदल दी। इस दौरान अनेक संतों और श्रद्धालुओं ने उत्पीड़न और संघर्ष का सामना किया, लेकिन आस्था पर डटे रहे।
उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा के क्षण को “आध्यात्मिक संतुष्टि” का पल बताया और कहा कि सदियों के इंतज़ार के बाद रामलला को उनके भव्य मंदिर में विराजमान देखना पूरे राष्ट्र के लिए गर्व और भावनात्मक जुड़ाव का विषय है। सिंह ने यह भी कहा कि अयोध्या आज तेजी से विकसित हो रहा है—जहाँ परंपरा और आधुनिक बुनियादी ढाँचा साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं—और यह परिवर्तन भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास का प्रतीक है।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। राजनाथ सिंह ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन ने न केवल अतीत को झकझोरा, बल्कि वर्तमान को दिशा दी और आने वाली पीढ़ियों के लिए नई नींव तैयार की। उनके अनुसार, अब अयोध्या की हर गली-चौराहा “राममय” दिखाई देता है, और यह भाव केवल शहर तक सीमित नहीं, बल्कि देश-दुनिया के उन सभी लोगों तक फैला है जो राम के आदर्शों में विश्वास रखते हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं थी, बल्कि भारतीय समाज में एक व्यापक आध्यात्मिक जागृति का संकेत थी—और वर्तमान पीढ़ी इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने के लिए खुद को सौभाग्यशाली मान सकती है।

