Petrol Diesel Price Hike 2026: ₹2-₹4 प्रति लीटर बढ़ोतरी संभव, महंगाई पर बड़ा असर

Petrol Diesel Price Hike
Petrol Diesel Price Hike

Petrol Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सरकारी सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतें और तेल विपणन कंपनियों पर बढ़ता आर्थिक दबाव बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लागत से कम कीमत पर बेच रही हैं। इस वजह से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो पेट्रोल और डीजल के दाम ₹2 से ₹4 प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है और संबंधित मंत्रालयों के बीच चर्चा जारी है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल इस संभावित बढ़ोतरी का मुख्य कारण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करते हैं, इस स्थिति से सीधे प्रभावित होते हैं।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनके अनुसार, कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब ₹24 और डीजल पर लगभग ₹30 तक का घाटा हो रहा है। इस स्थिति में लंबे समय तक कीमतों को स्थिर बनाए रखना कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।

गौर करने वाली बात यह है कि पिछले लगभग चार वर्षों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस दौरान वैश्विक स्तर पर कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की गई। हालांकि, अब बदलती परिस्थितियों में यह रणनीति ज्यादा समय तक जारी रखना मुश्किल हो सकता है।

अगर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। खासकर डीजल की कीमत बढ़ने से परिवहन लागत में इजाफा होगा, जिससे रोजमर्रा की चीजों जैसे फल, सब्जियां और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। इससे महंगाई दर पर भी दबाव बढ़ेगा और आम आदमी की परेशानी बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के सामने एक संतुलन बनाने की चुनौती है। एक तरफ तेल कंपनियों के घाटे को कम करना जरूरी है, तो दूसरी तरफ आम जनता पर बढ़ते महंगाई के बोझ को भी नियंत्रित करना है। आने वाले दिनों में इस पर क्या फैसला लिया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।