Iran Peace Proposal: लगातार बढ़ते तनाव और लंबे समय से जारी टकराव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ संबंध सुधारने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए एक नया कूटनीतिक प्रस्ताव पेश किया है। बताया जा रहा है कि यह 14-सूत्रीय प्रस्ताव है, जिसका मुख्य उद्देश्य युद्ध को खत्म करना और स्थिरता बहाल करना है।
3 मई को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव पूरी तरह युद्ध समाप्त करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि फिलहाल इसमें परमाणु मुद्दे को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया है, लेकिन अगर शुरुआती शर्तें पूरी होती हैं तो आगे चलकर इस पर बातचीत की जा सकती है।
प्रस्ताव के पहले चरण में ईरान ने युद्ध समाप्त करने, वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों व नाकेबंदी को हटाने की मांग की है। ईरान का मानना है कि इन कदमों से विश्वास बहाली होगी और आगे की बातचीत के लिए माहौल तैयार होगा।
दूसरे चरण में परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत का रास्ता खुल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान यूरेनियम संवर्धन को लंबे समय तक रोकने के विकल्प पर चर्चा करने को तैयार है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक, ईरान 15 वर्षों तक संवर्धन रोकने की पेशकश कर सकता है, जो पहले दिए गए पांच साल के प्रस्ताव से काफी अधिक है।
हालांकि, ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अपनी परमाणु सुविधाओं को खत्म नहीं करेगा। इसके बजाय, वह सीमित शर्तों के तहत अपने कार्यक्रम को जारी रखने पर बातचीत के लिए तैयार है। प्रस्ताव के मुताबिक, संवर्धन पर रोक की अवधि खत्म होने के बाद ईरान लगभग 3.6% तक यूरेनियम संवर्धन फिर से शुरू कर सकता है, जो कि संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के तहत तय सीमा के करीब है।
गौरतलब है कि 2015 में हुए JCPOA समझौते के तहत ईरान को सीमित स्तर पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति दी गई थी, बदले में उस पर लगे कई प्रतिबंध हटाए गए थे। लेकिन बाद में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका इस समझौते से बाहर निकल गया और ईरान पर फिर से सख्त प्रतिबंध लगा दिए गए। ट्रंप का रुख हमेशा यह रहा है कि ईरान को स्थायी रूप से यूरेनियम संवर्धन बंद करना चाहिए, जो अब भी दोनों देशों के बीच विवाद का बड़ा कारण है।
ईरान ने अपने प्रस्ताव में यह भी संकेत दिया है कि वह अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम (HEU) के भंडार को कम करने या उसे विदेश भेजने जैसे विकल्पों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। इसे विश्वास बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिका की प्रतिक्रिया अभी सतर्क बनी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात पर संदेह है कि इससे कोई ठोस समझौता हो पाएगा। यह बयान दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास को दर्शाता है।
ईरान ने इस प्रस्ताव में यह भी मांग की है कि अमेरिका उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाए, उसके बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां खत्म करे और क्षेत्र से अपने सैन्य बलों को वापस बुलाए। इसके अलावा, युद्ध और प्रतिबंधों से हुए नुकसान की भरपाई की भी मांग की गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय से लगे प्रतिबंधों और संघर्ष के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। 20 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो चुके हैं, जिससे सरकार पर आंतरिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
कुल मिलाकर, ईरान का यह नया प्रस्ताव टकराव से बातचीत की ओर बढ़ने का संकेत देता है। हालांकि अभी भी कई चुनौतियां हैं और दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है, लेकिन यह पहल भविष्य में किसी बड़े समझौते का रास्ता खोल सकती है।

