Pakistan इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। महंगाई, बढ़ते कर्ज और कमजोर आर्थिक वृद्धि के कारण देश की आम जनता पर भारी दबाव है। हालिया आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान में आय का वितरण बेहद असमान है। एक तरफ बड़ी आबादी बहुत कम आय पर जीवन गुजार रही है, वहीं दूसरी तरफ सीमित संख्या में लोग ऊंची आय अर्जित कर रहे हैं।
आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान की लगभग 24 करोड़ की आबादी में ऐसे लोगों की संख्या बेहद कम है जो हर महीने ₹1 लाख (भारतीय मुद्रा) से ज्यादा कमाते हैं। यह राशि लगभग 3 लाख पाकिस्तानी रुपये के बराबर मानी जाती है। रिपोर्टों के मुताबिक इस आय वर्ग में आने वाले लोगों की संख्या करीब 4 लाख से 10 लाख के बीच है। इसका मतलब यह है कि देश की कुल आबादी का केवल 0.2% से 0.4% हिस्सा ही इस स्तर की आय प्राप्त कर रहा है।
करदाताओं की संख्या भी बेहद कम
आर्थिक असमानता को समझने के लिए एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आता है—पंजीकृत करदाताओं की संख्या। पाकिस्तान में करदाताओं की कुल संख्या करीब 59 लाख बताई जाती है, जो देश की विशाल आबादी की तुलना में बेहद कम है। यह स्थिति बताती है कि बड़ी आबादी या तो अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम कर रही है या इतनी कम आय अर्जित करती है कि वह टैक्स देने की श्रेणी में नहीं आती।
पाकिस्तान की राजस्व प्रणाली का संचालन Federal Board of Revenue द्वारा किया जाता है, जबकि आर्थिक और सामाजिक आंकड़े Pakistan Bureau of Statistics जारी करता है। इन संस्थाओं के हालिया आंकड़ों से देश की आर्थिक असमानता का स्पष्ट संकेत मिलता है।
औसत वेतन बेहद कम
2024-25 के सर्वे के अनुसार पाकिस्तान में एक आम कामगार का औसत मासिक वेतन लगभग 39,042 पाकिस्तानी रुपये बताया गया है। यदि इसकी तुलना उन लोगों से की जाए जो भारतीय मुद्रा में ₹1 लाख के बराबर कमाते हैं, तो यह अंतर बेहद बड़ा नजर आता है।
दरअसल, जो व्यक्ति 3 लाख पाकिस्तानी रुपये प्रति माह कमाता है, उसकी आय औसत मजदूर की तुलना में लगभग आठ गुना ज्यादा होती है। यह अंतर दर्शाता है कि देश की संपत्ति और आय का बड़ा हिस्सा कुछ ही लोगों के हाथों में केंद्रित है, जबकि बड़ी आबादी सीमित संसाधनों में जीवन जी रही है।
किन क्षेत्रों में कमाते हैं ज्यादा पैसा?
पाकिस्तान में जो सीमित संख्या में लोग उच्च आय वर्ग में आते हैं, वे मुख्य रूप से कुछ खास पेशों से जुड़े होते हैं। इनमें सबसे प्रमुख क्षेत्र हैं:
आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर:
डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण अनुभवी सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, डेटा इंजीनियर और सिस्टम आर्किटेक्ट्स को अपेक्षाकृत बेहतर वेतन मिलता है।
कॉर्पोरेट सेक्टर:
बड़ी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषकर CEO और बैंकिंग सेक्टर के उच्च पदों पर बैठे अधिकारी राष्ट्रीय औसत से कई गुना ज्यादा वेतन प्राप्त करते हैं।
वित्तीय विशेषज्ञ:
अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट और वित्तीय सलाहकार भी पाकिस्तान में उच्च आय वर्ग में आते हैं। कई पेशेवर प्रति माह लाखों पाकिस्तानी रुपये तक की फीस लेते हैं।
इन पेशों में कौशल और अनुभव की मांग अधिक होती है, जिसके कारण इन क्षेत्रों में आय अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।
भारत और पाकिस्तान की मुद्रा का फर्क
आय की तुलना करते समय मुद्रा के मूल्य का भी बड़ा महत्व होता है। वर्तमान विनिमय दर के अनुसार India का ₹1 लगभग पाकिस्तान के ₹3 के बराबर माना जाता है।
इसका मतलब यह है कि यदि पाकिस्तान में कोई व्यक्ति 3 लाख पाकिस्तानी रुपये प्रति माह कमाता है, तभी उसकी आय भारत के ₹1 लाख के बराबर मानी जाएगी। यही कारण है कि आय के आंकड़ों की तुलना करते समय मुद्रा का यह अंतर आर्थिक तस्वीर को और स्पष्ट कर देता है।
बढ़ती आर्थिक असमानता
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में आय असमानता लगातार बढ़ती जा रही है। एक तरफ उच्च आय वर्ग के लोग आधुनिक कॉर्पोरेट और तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी आबादी सीमित रोजगार अवसरों और कम वेतन के कारण आर्थिक संघर्ष झेल रही है।
महंगाई, ऊर्जा संकट और कमजोर औद्योगिक विकास ने आम लोगों की क्रय शक्ति को भी प्रभावित किया है। यही कारण है कि देश में आर्थिक सुधार और रोजगार सृजन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
इन परिस्थितियों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कैसे आय के अवसरों को व्यापक बनाया जाए और आर्थिक विकास का लाभ समाज के बड़े हिस्से तक पहुंचाया जाए।

