Khyber Pakhtunkhwa: पाकिस्तान में एक बार फिर आतंकी हिंसा ने भयावह रूप ले लिया है। Peshawar और आसपास के इलाकों में हाल के दिनों में हुए हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट और करक जिलों में आतंकियों ने पहले पुलिस वाहन को निशाना बनाया और फिर घायलों को अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस पर हमला कर दिया। इन हमलों में एक डीएसपी सहित कुल 9 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कोहाट जिले में आतंकियों ने अदालत में पेशी के लिए ले जाए जा रहे आरोपियों से भरे पुलिस वाहन पर घात लगाकर हमला किया। वाहन में दो आरोपियों को कोर्ट ले जाया जा रहा था। हमले में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP), एक इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल मारे गए। एक आरोपी की भी इस हमले में मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावरों ने अचानक गोलीबारी की और घटना के बाद वाहन में आग लगा दी। अधिकारियों का कहना है कि हमला सुनियोजित था और हमलावर पहले से घात लगाए बैठे थे।
इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई, लेकिन आतंकियों ने अगले ही दिन एक और वारदात को अंजाम देकर हालात को और गंभीर बना दिया। करक जिले के बदरखेल इलाके में घायलों को अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस पर हमला कर दिया गया। इससे पहले डर्गाह शहीदान क्षेत्र में फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) की पोस्ट पर क्वाडकॉप्टर (ड्रोन) से हमला किया गया था, जिसमें पांच एफसी जवान घायल हुए थे।
जब घायलों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी आतंकियों ने उस वाहन को भी निशाना बनाया। इस हमले में तीन एफसी कर्मियों की मौत हो गई, जबकि दो बचावकर्मी घायल हुए। हमले के बाद पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया गया और सुरक्षा बलों ने संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की।
इससे पहले 16 फरवरी को बाजौर जिले में एक संयुक्त चेकपोस्ट पर आत्मघाती कार बम विस्फोट हुआ था, जिसमें 11 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। इस हमले की पुष्टि पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा Inter-Services Public Relations (ISPR) ने की थी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ये घटनाएं एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं, जिसका उद्देश्य राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करना है।
विश्लेषकों के अनुसार, 2022 में Tehreek-e-Taliban Pakistan (TTP) के साथ युद्धविराम समाप्त होने के बाद से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकी हमलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। युद्धविराम टूटने के बाद से सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से उग्रवाद और आतंकवाद से प्रभावित रहा है, लेकिन हालिया हमलों ने यह संकेत दिया है कि आतंकी संगठन अब अधिक संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो गए हैं। ड्रोन हमलों और समन्वित घात लगाकर किए गए हमले इस बदलती रणनीति को दर्शाते हैं।
पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे सीमावर्ती इलाकों में खुफिया नेटवर्क को मजबूत करें और आतंकी संगठनों की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाएं। लगातार बढ़ती हिंसा न केवल सुरक्षा बलों के लिए बल्कि आम नागरिकों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
इन ताजा घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान को आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर लंबी और कठिन लड़ाई का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में सरकार की रणनीति और सुरक्षा अभियानों की दिशा पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

