Israel Lebanon strikes: मध्य-पूर्व में जारी तनाव और अस्थायी युद्धविराम के बीच Benjamin Netanyahu ने एक सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इज़राइल अपने सभी सैन्य और रणनीतिक लक्ष्यों को हर हाल में पूरा करेगा—चाहे वह कूटनीतिक समझौते के जरिए हो या फिर दोबारा युद्ध शुरू करके।
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में इज़राइली जनता के साहस और सेना की बहादुरी की सराहना की। उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष में इज़राइल ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और देश पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि Iran इस संघर्ष के बाद पहले की तुलना में कमजोर हुआ है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आया है।
प्रधानमंत्री ने इस दौरान उन सैनिकों और नागरिकों को श्रद्धांजलि भी दी, जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब जमीनी हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और कई इलाकों में तनाव बना हुआ है।
इसी बीच, Israel Defense Forces (IDF) ने दावा किया है कि उसने बेरूत में हिज़्बुल्लाह से जुड़े एक अहम व्यक्ति को मार गिराया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अली यूसुफ हर्शी, जो संगठन के एक बड़े नेता का करीबी सहयोगी था, इज़राइली हमले में मारा गया। इसके अलावा, दक्षिणी लेबनान में हथियारों के ठिकानों और सप्लाई रूट्स को भी निशाना बनाया गया है, जिससे हिज़्बुल्लाह की सैन्य क्षमता को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
इज़राइल का कहना है कि लेबनान में उसकी सैन्य कार्रवाई फिलहाल जारी रहेगी। इसका एक बड़ा कारण यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम में लेबनान को शामिल नहीं किया गया है। इस स्थिति को JD Vance ने भी स्पष्ट करते हुए कहा कि सीजफायर समझौते में लेबनान से संबंधित कोई प्रतिबद्धता नहीं की गई थी।
हालांकि, इज़राइल की लगातार सैन्य कार्रवाई से लेबनान में हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। वहां से लगातार हवाई हमलों, भारी जनहानि और व्यापक तबाही की खबरें सामने आ रही हैं। नागरिक क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जिससे मानवीय संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू का यह बयान केवल घरेलू समर्थन मजबूत करने के लिए नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश है। वह यह दिखाना चाहते हैं कि इज़राइल अपने सुरक्षा हितों से कोई समझौता नहीं करेगा, चाहे इसके लिए उसे कूटनीति का रास्ता अपनाना पड़े या सैन्य कार्रवाई जारी रखनी पड़े।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या यह अस्थायी सीजफायर स्थायी शांति में बदल पाएगा या नहीं। एक ओर जहां अमेरिका और अन्य देश तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर जारी हमले इस प्रक्रिया को कमजोर कर रहे हैं।
मध्य-पूर्व पहले से ही लंबे समय से संघर्षों का केंद्र रहा है, और मौजूदा हालात ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि यहां शांति स्थापित करना कितना जटिल है। इज़राइल, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच बढ़ता तनाव आने वाले समय में और बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है, यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते।
फिलहाल, नेतन्याहू के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि इज़राइल अपनी रणनीति से पीछे हटने के मूड में नहीं है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है—क्या बातचीत से समाधान निकलेगा या फिर क्षेत्र एक बार फिर व्यापक युद्ध की ओर बढ़ेगा।

