Middle East tension: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच पूर्व भारतीय राजनयिक K.P. Fabian ने एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने मौजूदा संघर्ष के लिए United States और Israel को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि Iran इस समय केवल जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
फैबियन के अनुसार, मौजूदा हालात को समझने के लिए घटनाओं के क्रम और कूटनीतिक गतिविधियों को ध्यान में रखना जरूरी है। उनका मानना है कि ईरान का रवैया पूरी तरह आक्रामक नहीं, बल्कि रणनीतिक और संतुलित है।
ईरान की रणनीति पर क्या बोले फैबियन?
पूर्व राजनयिक का कहना है कि ईरान इस संकट को संभालने में सोच-समझकर कदम उठा रहा है। खासतौर पर Strait of Hormuz को लेकर उसका रुख काफी संतुलित दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि ईरान ने पूरी तरह से इस अहम समुद्री मार्ग को बंद नहीं किया है। बल्कि वह अन्य देशों के जहाजों के लिए रास्ता खुला रखना चाहता है, जबकि अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को पूरी तरह बाधित नहीं करना चाहता।
कूटनीतिक घटनाओं का जिक्र
फैबियन ने हाल ही में Sanae Takaichi की अमेरिका यात्रा और Donald Trump के साथ उनकी मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन उच्चस्तरीय वार्ताओं के बीच ईरान द्वारा दो जापानी नागरिकों को रिहा करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
उनका मानना है कि इस तरह के कदमों के जरिए ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि को संतुलित रखने और कूटनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
परमाणु खतरे पर क्या स्थिति है?
परमाणु हमले और रेडिएशन के खतरे को लेकर फैबियन ने कहा कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने International Atomic Energy Agency के हवाले से बताया कि अभी तक किसी बड़े रेडिएशन रिसाव के संकेत नहीं मिले हैं।
इसका मतलब है कि वर्तमान स्थिति में परमाणु खतरे की पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि हालात लगातार बदल रहे हैं और सतर्क रहना जरूरी है।
इतिहास से सीख: स्वेज नहर संकट का उदाहरण
फैबियन ने अपने बयान में इतिहास का भी जिक्र किया और Suez Canal Crisis का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अतीत में भी जब बड़ी शक्तियां इस क्षेत्र में टकराईं, तो हालात गंभीर हो गए थे।
उनका मानना है कि मौजूदा स्थिति भी उसी दिशा में बढ़ सकती है, अगर समय रहते कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया।
ऊर्जा संकट और भारत पर असर
मिडिल ईस्ट में तनाव का असर सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक भी है। फैबियन ने चेतावनी दी कि Qatar की गैस उत्पादन क्षमता में लगभग 17% की कमी आई है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने बताया कि इससे कतर को हर साल करीब 20 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। इसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।
अमेरिका की भूमिका पर सवाल
फैबियन ने यह भी दावा किया कि ईरान ने पहले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए कई शर्तें मान ली थीं। लेकिन Benjamin Netanyahu के प्रभाव में अमेरिका ने उस दिशा में आगे कदम नहीं बढ़ाया।
उनका कहना है कि यह फैसला मौजूदा तनाव की एक बड़ी वजह बन सकता है।
“खतरनाक वैश्विक स्थिति”
अंत में, फैबियन ने पूरे हालात को “खतरनाक वैश्विक स्थिति” बताया। उन्होंने कहा कि त्योहारों जैसे Eid के दौरान हमले होना बेहद चिंताजनक है और यह दर्शाता है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है—चाहे वह ऊर्जा संकट हो, महंगाई हो या वैश्विक सुरक्षा।

