एप्सटीन केस में नए खुलासे, फॉरेंसिक दावों से फिर गरमाई बहस

Epstein Case
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Jeffrey Epstein Case: अमेरिकी फाइनेंसर और दोषी यौन अपराधी Jeffrey Epstein की मौत को लेकर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में सामने आए कुछ नए दस्तावेज़, कथित वीडियो फुटेज और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक Mario Nawfal द्वारा लिए गए इंटरव्यूज़ ने इस मामले को दोबारा वैश्विक बहस का विषय बना दिया है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये दावे अभी जांच और सार्वजनिक चर्चा के दायरे में हैं, न कि अदालत द्वारा स्थापित तथ्य।

फॉरेंसिक विश्लेषण पर उठे सवाल

एक इंटरव्यू में फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. गैरीसन (जिनका नाम विभिन्न रिपोर्टों में सामने आया है) ने दावा किया कि अस्पताल से बाहर ले जाए गए शव की कुछ तस्वीरें एप्सटीन से मेल नहीं खातीं। उनके अनुसार, कान और नाक की संरचना में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हालिया फाइलों में Federal Bureau of Investigation (FBI) ने कथित तौर पर मीडिया को गुमराह करने के लिए “डिकॉय बॉडी” इस्तेमाल करने की बात स्वीकार की है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

डॉ. गैरीसन ने ऑटोप्सी रिपोर्ट में कथित विसंगतियों की ओर भी इशारा किया। उनका कहना है कि रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण विवरणों का अभाव है, जबकि कुछ पीड़िताओं के बयान शरीर की बनावट को अलग तरह से बताते हैं। इसके अलावा, यह भी आरोप लगाया गया कि मौत की घोषणा से जुड़ी प्रेस रिलीज़ की तारीख पर सवाल उठते हैं। इन सभी दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जेल कैमरों को लेकर विवाद

एप्सटीन की 2019 में जेल में हुई मौत को आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया था। उस समय यह भी सामने आया था कि जिस जेल में वे बंद थे, वहां के निगरानी कैमरे कथित तौर पर घटना के समय काम नहीं कर रहे थे। अब नए इंटरव्यू में दावा किया गया है कि कैमरे उसी अवधि में बंद हुए जब एप्सटीन को उनकी कोठरी में वापस लाया गया और अगले दिन फिर से सक्रिय हो गए।

अमेरिकी न्याय विभाग, यानी Department of Justice, ने पहले कहा था कि कुछ फुटेज रिकॉर्ड नहीं हो रहे थे। लेकिन नए आरोपों में कहा गया है कि कुछ रिकॉर्डिंग मौजूद हो सकती हैं। इन दावों पर अभी तक किसी एजेंसी की ओर से नया आधिकारिक बयान नहीं आया है।

कथित कोडेड ईमेल्स पर चर्चा

नवीनतम फाइलों में कुछ ईमेल्स का उल्लेख किया गया है, जिनमें “पिज़्ज़ा”, “चीज़”, “बीफ जर्की”, “श्रिम्प” और “व्हाइट शार्क” जैसे शब्द असामान्य संदर्भों में इस्तेमाल हुए बताए जा रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का दावा है कि ये शब्द कथित तौर पर कोड के रूप में प्रयुक्त हो सकते हैं। हालांकि, इन व्याख्याओं की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

कथित पीड़िता का बयान

एक अन्य इंटरव्यू में एप्सटीन की कथित पीड़िता जूलियट ब्रायंट ने दावा किया कि 2002 से 2004 के बीच उन्हें डराया-धमकाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एप्सटीन खुद को प्रभावशाली और खुफिया एजेंसियों से जुड़ा बताता था। ब्रायंट ने यह भी कहा कि उनके साथ बिना सहमति के कुछ चिकित्सकीय प्रक्रियाएं की गईं। ये आरोप गंभीर हैं, लेकिन इन पर भी अभी कोई नया न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

प्रभावशाली नेटवर्क और ब्लैकमेल के आरोप

फॉरेंसिक विश्लेषक ने यह भी दावा किया कि एप्सटीन के पास कई प्रभावशाली लोगों से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज़ या सामग्री हो सकती थी, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से ब्लैकमेल के लिए किया जा सकता था। मशहूर फिल्म निर्माता Woody Allen का एक पुराना बयान भी चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने एप्सटीन की तुलना “काउंट ड्रैकुला” से की थी। हालांकि, यह एक व्यक्तिगत टिप्पणी थी और किसी कानूनी निष्कर्ष का हिस्सा नहीं है।

एप्सटीन की मौत को लेकर पहले भी कई सवाल उठते रहे हैं। नए दावों और इंटरव्यूज़ ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है। लेकिन फिलहाल ये सभी आरोप और दावे जांच और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा हैं। किसी भी नए निष्कर्ष के लिए आधिकारिक जांच एजेंसियों की पुष्टि आवश्यक होगी।

जब तक संबंधित एजेंसियां ठोस प्रमाणों के साथ नया निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं करतीं, तब तक इन दावों को सावधानीपूर्वक और आलोचनात्मक दृष्टि से देखने की जरूरत है।