अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने प्रवासियों और नागरिकता से जुड़े मुद्दे पर एक ऐसा बयान दिया है जिसने नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जो लोग अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करते हैं, उन्हें खुद को सबसे पहले अमेरिकी मानना चाहिए, न कि उस देश का जिससे वे मूल रूप से आए हैं। उनका यह बयान जॉर्जिया विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए सामने आया।
अपने संबोधन के दौरान वेंस ने नागरिकता के साथ आने वाली जिम्मेदारियों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाहे किसी व्यक्ति का परिवार पीढ़ियों से अमेरिका में रह रहा हो या वह हाल ही में नागरिक बना हो, हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अमेरिका के हित को सर्वोपरि रखे। उनका कहना था कि यह व्यवस्था तभी मजबूत रह सकती है जब हर नागरिक खुद को पूरी तरह से अमेरिकी मानकर निर्णय ले।
यह बयान उस समय आया जब एक भारतीय मूल की छात्रा ने उनसे एच-1बी वीजा प्रणाली में कथित धोखाधड़ी और ग्रीन कार्ड मिलने में देरी को लेकर सवाल पूछा। इस पर जवाब देते हुए वेंस ने कहा कि वे इस बात को स्वीकार करते हैं कि वीजा प्रणाली में खामियां हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकता का अर्थ केवल अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है।
वेंस ने कहा, “जब आप अमेरिकी नागरिक बनते हैं, तो आपको देश के सर्वोत्तम हित के बारे में सोचना चाहिए, न कि उस देश के बारे में जहां से आप आए हैं या उस समूह के बारे में जिससे आप जुड़े रहे हैं।” उनका यह बयान सीधे तौर पर प्रवासियों के उस भावनात्मक जुड़ाव पर टिप्पणी करता है जो वे अपने मूल देश के साथ बनाए रखते हैं।
अपने विचार को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने एक व्यक्तिगत उदाहरण भी साझा किया। JD Vance ने बताया कि उनकी शादी Usha Vance से हुई है, जिनका परिवार भारत से अमेरिका आकर बसा था। उन्होंने कहा कि उनके ससुर, जो भारत से अमेरिका आए और यहां नागरिक बने, उन्होंने कभी भी उनसे अपने मूल देश के हित में कोई विशेष काम करने के लिए नहीं कहा।
वेंस ने इस उदाहरण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि सच्ची नागरिकता वही है जिसमें व्यक्ति अपने नए देश के प्रति पूरी निष्ठा रखे। उन्होंने कहा कि उनके ससुर ने अमेरिका में शिक्षा प्राप्त की, यहां जीवन बनाया और पूरी तरह अमेरिकी मूल्यों को अपनाया।
इसके अलावा, वेंस ने अपने सीनेट चुनाव प्रचार के दौरान हुई एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक यूक्रेनी मूल के अमेरिकी नागरिक ने उनसे यूक्रेन के समर्थन में कदम उठाने का अनुरोध किया था। इस पर वेंस ने उसे जवाब दिया था कि यदि वह अमेरिकी है, तो उसे अमेरिका के हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में आव्रजन, वीजा नीतियों और नागरिकता से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। Turning Point USA द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वेंस ने एच-1बी वीजा प्रणाली पर भी टिप्पणी की और कहा कि इसमें कई तरह की धोखाधड़ी होती है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रवासियों ने अमेरिका के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि विभिन्न देशों से आए लोगों ने अमेरिका को समृद्ध और शक्तिशाली बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
वेंस का यह बयान जहां एक ओर कुछ लोगों को सख्त और स्पष्ट संदेश के रूप में दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर यह प्रवासी समुदाय के भीतर एक नई चर्चा को भी जन्म दे सकता है। खासतौर पर भारतीय मूल के लोगों के बीच, जो बड़ी संख्या में अमेरिका में रह रहे हैं और वहां की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
कुल मिलाकर, वेंस का यह बयान नागरिकता की परिभाषा और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों पर एक नई दृष्टि प्रस्तुत करता है। यह सवाल भी उठाता है कि क्या वैश्विक दुनिया में, जहां लोग कई संस्कृतियों से जुड़े होते हैं, पूरी तरह से एक पहचान अपनाना संभव है या नहीं।

