Social Media ban: भारत में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर एक बड़ी बहस के बीच एक नया वैश्विक सर्वे सामने आया है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर चौंकाने वाला समर्थन देखने को मिला है। इस अध्ययन के अनुसार, भारत में करीब 75 प्रतिशत अभिभावक इस तरह के बैन के पक्ष में हैं। यह आंकड़ा भारत को इस मुद्दे पर दुनिया में दूसरे स्थान पर लाता है, जहां केवल मलेशिया इससे आगे है।
यह शोध ब्रिटेन स्थित Varkey Foundation द्वारा जारी किया गया है, जिसमें ‘फैमिली फर्स्ट’ पहल के तहत दुनिया भर के परिवारों के विचारों को समझने की कोशिश की गई। खास बात यह है कि इस मुद्दे पर केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी यानी Gen-Z भी बड़ी संख्या में इस प्रतिबंध का समर्थन कर रही है।
भारत में 73 प्रतिशत Gen-Z प्रतिभागियों ने 16 साल से पहले सोशल मीडिया बैन का समर्थन किया, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है क्योंकि यही पीढ़ी सोशल मीडिया के साथ बड़ी हुई है। आमतौर पर माना जाता है कि युवा वर्ग ऐसे किसी प्रतिबंध के खिलाफ होगा, लेकिन इस सर्वे ने इस धारणा को बदल दिया है।
इस अध्ययन के लिए शोध एजेंसी ‘We Are Family’ ने जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान व्यापक स्तर पर सर्वे किया। इसमें 6,000 से अधिक माता-पिता, 9 से 18 साल के 6,000 से अधिक बच्चे, 3,000 दादा-दादी और 3,000 Gen-Z प्रतिभागियों को शामिल किया गया। यह सर्वे भारत समेत अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जापान, केन्या, मलेशिया, नाइजीरिया, स्वीडन, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में किया गया।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मलेशिया, भारत और फ्रांस जैसे देशों में सोशल मीडिया बैन को लेकर सबसे ज्यादा समर्थन है, जबकि जापान में इसका समर्थन सबसे कम यानी केवल 38 प्रतिशत है। इसके बाद नाइजीरिया (39 प्रतिशत) और अमेरिका (51 प्रतिशत) का स्थान है।
दिलचस्प बात यह है कि Australia, जो हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू करने वाला पहला देश बना है, वहां भी 66 प्रतिशत माता-पिता इस फैसले के समर्थन में हैं। यह दिखाता है कि दुनिया भर में इस मुद्दे पर चिंता तेजी से बढ़ रही है।
हालांकि, वैश्विक स्तर पर माता-पिता और बच्चों के बीच इस विषय पर मतभेद भी देखने को मिलते हैं। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में केवल 37 प्रतिशत बच्चे इस तरह के प्रतिबंध का समर्थन करते हैं, जबकि उनके माता-पिता का समर्थन कहीं अधिक है। इस तरह दोनों के बीच लगभग 23 प्रतिशत का अंतर देखा गया है।
लेकिन भारत इस मामले में अलग नजर आता है। यहां माता-पिता और बच्चों के विचार काफी हद तक मेल खाते हैं, जो यह संकेत देता है कि सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।
इस शोध पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘फैमिली फर्स्ट’ और Varkey Foundation के संस्थापक सनी वर्की ने कहा कि यह अध्ययन डिजिटल युग में परिवारों के सामने बढ़ते तनाव को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में माता-पिता अपने बच्चों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य केवल प्रतिबंध पर बहस करना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि तकनीक किस तरह पारिवारिक रिश्तों और युवाओं के मूल्यों को प्रभावित कर रही है।
कुल मिलाकर, यह सर्वे एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। जहां एक ओर सोशल मीडिया आधुनिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है, वहीं दूसरी ओर इसके प्रभाव को लेकर चिंता भी बढ़ती जा रही है। भारत में जिस तरह से माता-पिता और युवा दोनों इस प्रतिबंध के समर्थन में हैं, वह यह दर्शाता है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर गंभीर नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं।

