Israel Lebanon Attack: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्ला के 200 से अधिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई और जमीनी हमले किए हैं। ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब वॉशिंगटन में इजराइल और लेबनान के अधिकारियों के बीच दशकों बाद पहली बार सीधी बातचीत हुई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलों के दौरान तटीय शहर टायर के ऊपर धुएं के गुबार देखे गए, जो हमलों की तीव्रता को दर्शाते हैं। अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बावजूद इजराइल ने हिज्बुल्ला के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी है।
दक्षिणी लेबनान में तेज हमले
लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, दक्षिणी हिस्सों में कई जगहों पर हवाई हमले और गोलाबारी हुई है। बिन्त जबील के आसपास के इलाकों में इजराइली सेना ने हिज्बुल्ला लड़ाकों को घेरने की कोशिश तेज कर दी है।
हालांकि हाल ही में इजराइल और लेबनान के बीच हुई बातचीत को ऐतिहासिक माना जा रहा था, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। बातचीत के बावजूद संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा।
बढ़ता मानवीय संकट
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ा है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक कम से कम 2,167 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं, जिससे एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है।
दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। खाने-पीने और जरूरी सुविधाओं की कमी लगातार बढ़ रही है, जिससे हालात और खराब हो सकते हैं।
युद्धविराम पर टकराव
लेबनानी अधिकारी लगातार युद्धविराम की मांग कर रहे हैं ताकि इस हिंसा को रोका जा सके। वहीं इजराइल का कहना है कि स्थायी शांति के लिए लेबनान सरकार को हिज्बुल्ला को निरस्त्र करना होगा।
इस मांग को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद बने हुए हैं। हिज्बुल्ला के प्रतिनिधि हसन फदलल्लाह ने इजराइल के साथ बातचीत करने पर लेबनानी अधिकारियों की आलोचना की है, जिससे आंतरिक तनाव भी सामने आया है।
कैसे शुरू हुआ ताजा संघर्ष
यह टकराव 2 मार्च को और तेज हो गया, जब हिज्बुल्ला ने उत्तरी इजराइल पर रॉकेट हमले किए। इसके जवाब में इजराइल ने बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।
तब से दोनों पक्षों के बीच लगातार हमले जारी हैं और स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होती जा रही है।
वैश्विक चिंता बढ़ी
इस बढ़ते संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो यह संघर्ष और बड़े क्षेत्र में फैल सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता पर खतरा पैदा हो सकता है।
इजराइल और हिज्बुल्ला के बीच बढ़ता यह संघर्ष एक बार फिर दिखाता है कि क्षेत्र में शांति कितनी नाजुक है। बातचीत और युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद जमीनी हकीकत अभी भी हिंसक बनी हुई है।
बढ़ती मौतें, विस्थापन और आर्थिक नुकसान इस बात का संकेत हैं कि जल्द समाधान न निकला तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

