Iran US war: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच Iran ने स्पष्ट कर दिया है कि वह United States के साथ युद्धविराम की किसी पहल का समर्थन नहीं कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि तेहरान युद्ध रोकने के लिए बातचीत की कोशिश कर रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में अराघची ने कहा कि ईरान ने न तो युद्धविराम की मांग की है और न ही अमेरिका के साथ बातचीत की कोई पहल की है। उन्होंने अमेरिकी दावों को “भ्रमपूर्ण” करार देते हुए कहा कि जब तक Donald Trump यह स्वीकार नहीं करते कि यह युद्ध “गैरकानूनी” है और भविष्य में दोबारा ऐसी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ईरान संघर्ष जारी रखेगा।
निर्णायक अंत चाहता है ईरान
तेहरान में आयोजित साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अराघची ने कहा कि ईरान युद्ध को लंबा खींचना नहीं चाहता, लेकिन इसका अंत ऐसा होना चाहिए जिससे भविष्य में कोई भी देश ईरान पर हमला करने की हिम्मत न कर सके।
उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी स्थिति में “बिना शर्त आत्मसमर्पण” स्वीकार नहीं करेगा। उनके अनुसार जो देश ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं, वे अपनी पूरी सैन्य शक्ति झोंकने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि Strait of Hormuz में ईरान की कार्रवाई केवल उन जहाजों के खिलाफ होती है जो उन देशों से जुड़े होते हैं जो सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर सीधा असर डाल सकता है।
इजरायल का बड़ा दावा
इस बीच Israel की सेना ने एक बड़ा दावा किया है। Israel Defense Forces के अनुसार उन्होंने तेहरान के Mehrabad Airport पर एक विमान को नष्ट कर दिया है, जिसका इस्तेमाल ईरान के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेताओं की यात्रा के लिए किया जाता था।
इजरायली सेना का दावा है कि यह विमान Airbus A340 था। बताया जा रहा है कि इसका उपयोग ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian की विदेश यात्राओं के लिए किया जाता रहा है और इससे पहले इसे ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की यात्राओं के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था।
यदि यह दावा सही साबित होता है, तो विशेषज्ञों के अनुसार इससे ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच समन्वय पर असर पड़ सकता है। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने अभी तक इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
कई शहरों में हमले
रिपोर्टों के मुताबिक इजरायली सेना ने सोमवार को तेहरान के अलावा Shiraz और Tabriz सहित कई शहरों में सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।
यह अभियान 28 फरवरी को शुरू हुए संयुक्त अमेरिकी-इजरायली सैन्य हमलों के बाद लगातार जारी है। इन हमलों के जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
क्षेत्रीय तनाव और बढ़ती चिंता
मध्य-पूर्व में तेजी से बढ़ते इस सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल ईरान का यह कड़ा रुख संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और जटिल हो सकता है, क्योंकि तेहरान स्पष्ट कर चुका है कि वह केवल युद्धविराम नहीं बल्कि ऐसा “निर्णायक अंत” चाहता है जिससे भविष्य में उस पर हमला करने की किसी भी कोशिश को रोका जा सके।

