Iran News: मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध के माहौल के बीच Iran ने भारत के प्रति आभार व्यक्त किया है। संकट की इस घड़ी में India ने मानवीय आधार पर ईरान की मदद करते हुए उसके नौसैनिक जहाज़ IRIS Lavan को Kochi पोर्ट पर सुरक्षित रूप से ठहरने की अनुमति दी। इस कदम को दोनों देशों के बीच पुराने और भरोसेमंद संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
भारत में ईरान के राजदूत Mohammad Fathali ने इस सहायता के लिए भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग उस समय मिला है जब क्षेत्र में युद्ध और अस्थिरता के कारण हालात बेहद कठिन हैं।
जहाज़ डूबने के बाद बढ़ी चिंता
राजदूत फतहाली के अनुसार यह स्थिति उस घटना के बाद बनी जब ईरानी नौसैनिक जहाज़ IRIS Dena हिंद महासागर में डूब गया। रिपोर्टों के मुताबिक यह हादसा Sri Lanka के तट के पास हुआ। बताया जा रहा है कि जहाज़ को एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा किए गए टॉरपीडो हमले के बाद नुकसान पहुंचा, जिसके कारण वह समुद्र में डूब गया।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस घटना की जांच अभी जारी है और जहाज़ के चालक दल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इस बीच भारत द्वारा दिए गए सहयोग को ईरान ने बेहद महत्वपूर्ण बताया है।
भारत के मानवीय कदम की सराहना
ईरानी राजदूत ने कहा कि भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जहाज़ को कोच्चि बंदरगाह पर डॉकिंग की अनुमति दी। उन्होंने कहा, “हम भारत सरकार और स्थानीय अधिकारियों के सहयोग और मानवीय दृष्टिकोण के लिए दिल से धन्यवाद देते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि संकट के इस समय में भारत का समर्थन दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे मित्रवत संबंधों को दर्शाता है। उनके अनुसार यह सहयोग दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी दोनों देश एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।
कोच्चि में ठहरे 183 नाविक
सूत्रों के मुताबिक IRIS Lavan में कुल 183 क्रू सदस्य मौजूद हैं। इन सभी को भारतीय नौसेना की सुविधाओं में सुरक्षित ठहराया गया है। भारत ने जहाज़ को तकनीकी सहायता और लॉजिस्टिक समर्थन भी उपलब्ध कराया है, ताकि चालक दल को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बचाव अभियान के दौरान भारतीय नौसेना की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जब IRIS Dena समुद्र में डूबा, तब भारत ने तुरंत खोज और बचाव अभियान में मदद के लिए अपने संसाधन तैनात किए।
भारतीय नौसेना की बड़ी भूमिका
इस अभियान के दौरान भारतीय नौसेना ने कई संसाधन सक्रिय किए। इनमें INS Tarangini, INS Ikshak और Boeing P-8I Poseidon समुद्री गश्ती विमान शामिल थे। इनकी मदद से समुद्र में खोज और बचाव अभियान चलाया गया।
रिपोर्टों के अनुसार डूबे जहाज़ में लगभग 180 नाविक मौजूद थे। इस हादसे में करीब 87 लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 32 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया। बाकी लोगों की तलाश और स्थिति को लेकर जांच जारी है।
जयशंकर ने बताया मानवीय निर्णय
भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने Raisina Dialogue 2026 के दौरान कहा कि भारत का यह फैसला पूरी तरह मानवीय आधार पर लिया गया है।
जयशंकर ने कहा कि जहाज़ और उसके युवा चालक दल “गलत समय पर गलत जगह” फंस गए थे और ऐसे समय में मदद करना भारत का कर्तव्य था।
ईरान के राजदूत ने भी विश्वास जताया कि Tehran और New Delhi के बीच ऐतिहासिक और रचनात्मक संबंध भविष्य में और मजबूत होंगे। उन्होंने भारत सरकार और यहां के लोगों को सहयोग और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।

