मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच भारत के पूर्व खुफिया अधिकारी Laxman Singh Bisht, जिन्हें Lucky Bisht के नाम से जाना जाता है, ने एक वीडियो जारी कर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते तनाव में केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि खुफिया एजेंसियों की गतिविधियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं।
लकी बिष्ट के मुताबिक मौजूदा घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि ईरान के पास बेहद संवेदनशील सैन्य जानकारी पहुंच रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिका की कुछ अहम सैन्य लोकेशनों और रणनीतिक ठिकानों की जानकारी ईरान तक आखिर कैसे पहुंच रही है।
संवेदनशील सैन्य जानकारी पर उठे सवाल
अपने वीडियो संदेश में बिष्ट ने कहा कि हाल की घटनाओं से ऐसा प्रतीत होता है कि ईरान को अमेरिका के कमांड पोस्ट और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां पहले से मिल रही हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिकी सैन्य तैयारियों से जुड़े मिलिट्री स्टेजिंग एरिया यानी वह स्थान जहां से सैन्य कार्रवाई की तैयारी की जाती है, उनकी लोकेशन भी कथित तौर पर ईरान तक कैसे पहुंच रही है।
इसके अलावा उन्होंने यह दावा भी किया कि दुबई के एक होटल से संचालित कथित मोसाद कमांड बेस से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक चर्चा में आई है। बिष्ट के अनुसार इतनी सटीक और संवेदनशील जानकारी बिना किसी मजबूत खुफिया नेटवर्क के मिलना बेहद कठिन है।
आख़िर कौन सी खुफिया ताकत ईरान के पीछे खड़ी है?
जिसे अमेरिका के Command Post की लोकेशन पता है,
Military Staging Area कहाँ है यह भी पता है,
यहाँ तक कि दुबई के किस होटल से Mossad अपना कमांड बेस चला रहा हैदुनिया में कोई न कोई बहुत बड़ा खेल चल रहा है।#Iran #USA #Israel #MiddleEast… pic.twitter.com/gxSY3DzuP4
— Lucky Bisht (@iamluckybisht) March 7, 2026
खुफिया युद्ध की संभावना
लकी बिष्ट का कहना है कि मध्य पूर्व में चल रही यह लड़ाई केवल मिसाइल हमलों और हवाई कार्रवाई तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार इसके पीछे एक “खुफिया युद्ध” भी चल रहा है, जिसमें विभिन्न देशों की खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो सकती हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि संभव है कि किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसी का समर्थन ईरान को मिल रहा हो। हालांकि उन्होंने किसी विशेष एजेंसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान ने मौजूदा संघर्ष को लेकर नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं।
आधुनिक युद्ध में खुफिया एजेंसियों की भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों के जरिए नहीं लड़े जाते। खुफिया एजेंसियां दुश्मन की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने, साइबर निगरानी करने और रणनीतिक जानकारी जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
ऐसे कई मामलों में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, उपग्रह डेटा और साइबर ऑपरेशन के जरिए संवेदनशील जानकारी हासिल की जाती है। यही कारण है कि किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष में खुफिया नेटवर्क की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।
क्षेत्रीय संघर्ष की जटिलता
मिडिल ईस्ट का मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल पहले से ही जटिल रहा है। इस क्षेत्र में कई देशों और संगठनों के हित जुड़े हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार Syria के कुछ हिस्सों में भी हालात काफी संवेदनशील बने हुए हैं।
खासकर Idlib क्षेत्र को लंबे समय से सीरियाई गृहयुद्ध का सबसे जटिल युद्धक्षेत्र माना जाता है। यहां वर्षों से सरकारी बलों, ईरान समर्थित समूहों, विद्रोही संगठनों और कई अंतरराष्ट्रीय ताकतों के बीच टकराव होता रहा है।
अंतरराष्ट्रीय खुफिया गतिविधियां
हाल की रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि National Intelligence Organization ने ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI6 से सीरिया के राष्ट्रपति Ahmed al‑Sharaa की सुरक्षा को लेकर अधिक भूमिका निभाने का अनुरोध किया था।
सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ समय में आतंकवादी संगठन Islamic State ने भी सीरिया में अपनी गतिविधियां तेज की हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पिछले वर्ष अहमद अल-शरा पर पांच बार हत्या के प्रयास किए गए थे।
नए सवाल खड़े हुए
लकी बिष्ट के इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट के मौजूदा संघर्ष को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान को वास्तव में इतनी सटीक सैन्य जानकारी मिल रही है, तो इसके पीछे किसी बड़े खुफिया नेटवर्क की भूमिका हो सकती है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन दावों में कितनी सच्चाई है, लेकिन इतना तय है कि आधुनिक युद्धों में खुफिया एजेंसियों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

