Iran missile attack: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर बड़ा सैन्य कदम उठाते हुए इज़राइल पर मिसाइल हमला किया है। इस हमले को Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने “Operation True Promise-4” के तहत अंजाम दिया, जिसमें कथित तौर पर एक नई और उन्नत मिसाइल का इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह इस ऑपरेशन की 65वीं लहर थी और पहली बार “नसरल्लाह” नाम की मिसाइल का उपयोग किया गया। ईरान ने इसे अपनी आधुनिक सैन्य क्षमता का प्रतीक बताया है। इस हमले में इज़राइल के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
हमले की वजह क्या बताई गई?
ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुए पहले हमले के जवाब में की गई है। साउथ पार्स दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक माना जाता है और इस पर किसी भी तरह का हमला क्षेत्रीय और वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
इस जवाबी कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में पहले से चल रहा तनाव और गहरा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले न केवल सैन्य टकराव को बढ़ा सकते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट की आशंका भी पैदा कर सकते हैं।
क्या है “नसरल्लाह” मिसाइल?
नई “नसरल्लाह” मिसाइल को ईरान की उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक का हिस्सा बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह पुरानी Qadr (Ghadr) सीरीज का एक एडवांस वर्जन है। इस मिसाइल का नाम हसन नसरल्लाह के नाम पर रखा गया है, जो एक राजनीतिक और रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस मिसाइल में कई अत्याधुनिक क्षमताएं शामिल हैं:
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यह एक साथ कई वारहेड ले जाने में सक्षम बताई जा रही है, जिससे एक ही हमले में कई लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है।
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यह प्रिसीजन-गाइडेड है, यानी यह अपने लक्ष्य को अधिक सटीकता से भेद सकती है।
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इसकी मारक क्षमता लगभग 1500 से 2000 किलोमीटर या उससे अधिक बताई जा रही है, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
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इसकी गति Mach 5+ से अधिक बताई जा रही है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन हो जाता है।
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इसे ड्रोन और अन्य मिसाइलों के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे दुश्मन की रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ता है।
किन ठिकानों को बना सकती है निशाना?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल खास तौर पर हाई-वैल्यू टारगेट्स के लिए डिजाइन की गई है। इसमें तेल रिफाइनरी, गैस प्लांट, एयरबेस, सैन्य ठिकाने और कमांड सेंटर जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। इसकी सटीकता और शक्ति इसे आधुनिक युद्ध में एक प्रभावी हथियार बनाती है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। नसरल्लाह मिसाइल जैसी लंबी दूरी और उच्च सटीकता वाली तकनीकें क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बदल सकती हैं। खासकर ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने से वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है।
ईरान की सैन्य क्षमता पर चर्चा
हालिया घटनाओं से यह स्पष्ट हो रहा है कि ईरान अपनी मिसाइल क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। IRGC का दावा है कि उनके मोबाइल लॉन्चर और भूमिगत ठिकाने पूरी तरह सुरक्षित हैं और वे भविष्य में भी अपने सैन्य अभियानों को जारी रखेंगे।
नेतन्याहू के दावों पर उठे सवाल
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले दावा किया था कि ईरान की मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है। हालांकि, हालिया हमलों और नई मिसाइल के इस्तेमाल ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुल मिलाकर, ईरान का यह नया मिसाइल परीक्षण और हमला न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस स्थिति का असर वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर साफ तौर पर देखा जा सकता है।

