Ceasefire Crisis: ईरान भड़का, होर्मुज बंद! लेबनान हमलों से संकट

Ceasefire Crisis
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Ceasefire Crisis: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित युद्धविराम के बावजूद पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। क्षेत्र में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, खासकर इजराइल और लेबनान के बीच बढ़ते संघर्ष ने तनाव को और गहरा कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी चिंता बढ़ा दी है।

ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर लेबनान पर इजराइल के हमले नहीं रुके, तो वह अमेरिका के साथ हुए सीजफायर से पीछे हट सकता है। ईरान का आरोप है कि युद्धविराम लागू होने के बावजूद उस पर अप्रत्यक्ष हमले जारी हैं। उसने लवान और सीरी आइलैंड पर हुए हमलों का हवाला देते हुए इजराइल पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

इस बीच, ईरान ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों की आवाजाही रोक दी है। यह फैसला वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से तेल आयात करता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

दूसरी ओर, अमेरिका और इजराइल का रुख इस मामले में स्पष्ट है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि यह युद्धविराम केवल अमेरिका और ईरान के बीच है, इसमें लेबनान शामिल नहीं है। इजराइल का भी यही कहना है कि लेबनान में हिजबुल्लाह की मौजूदगी और गतिविधियों के कारण वहां किसी तरह का सीजफायर लागू नहीं होता। यही वजह है कि इजराइल ने एक ओर जहां अमेरिका-ईरान समझौते का समर्थन किया है, वहीं दूसरी ओर उसने लेबनान पर अपने हवाई हमले और तेज कर दिए हैं।

गौरतलब है कि करीब 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिनों के युद्धविराम पर सहमति बनी थी। इस दौरान दोनों देशों को एक-दूसरे पर हमला नहीं करना था। लेकिन युद्धविराम लागू होने के कुछ ही घंटों के भीतर हालात बिगड़ते दिखाई देने लगे, जिससे यह समझौता शुरुआत में ही संकट में पड़ गया है।

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इजराइल के हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने बेरूत समेत कई इलाकों में हुए हमलों को “बर्बर” करार देते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों को गहरा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग भी की है।

इस संघर्ष का मानवीय असर भी बेहद गंभीर होता जा रहा है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, हालिया हमलों में 89 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कई रिहायशी इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं और अस्पतालों पर भारी दबाव है। बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हुए हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहा है।

कुल मिलाकर, यह साफ है कि अमेरिका-ईरान के बीच हुआ युद्धविराम अब बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच चुका है। अगर लेबनान में हिंसा जारी रहती है और कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो पूरा क्षेत्र एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।