यूरोप ने कहा—यूक्रेन की मंजूरी बिना कोई US-Russia peace plan स्वीकार नहीं

US-Russia peace plan
US-Russia peace plan

अमेरिका और रूस के बीच कथित US-Russia peace plan की खबरों ने यूरोपीय देशों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। यूरोपीय नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यूक्रेन पर चल रहे रूसी हमले को रोकने के किसी भी प्रयास में यूक्रेन की मंजूरी और यूरोप की भागीदारी अनिवार्य है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि वाशिंगटन और मॉस्को एक संभावित शांति समझौते पर विचार कर रहे हैं।

इन चर्चाओं ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर दबाव बढ़ा दिया है, जो रूस की विशाल सैन्य ताकत के खिलाफ युद्ध का नेतृत्व कर रहे हैं। जेलेंस्की लगातार यूरोपीय नेताओं से मिल रहे हैं ताकि यूक्रेन को निरंतर समर्थन मिल सके। इसी दौरान वह ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े बड़े भ्रष्टाचार मामले का सामना भी कर रहे हैं, जिसने देश में आक्रोश बढ़ाया है।

ब्रसेल्स में ईयू की 27 सदस्यीय बैठक की शुरुआत में ईयू की विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने कहा:
“किसी भी योजना की सफलता के लिए यूक्रेनियों और यूरोपियनों की सहमति जरूरी है।”

जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने भी कहा कि “युद्धविराम या यूक्रेन के भविष्य को लेकर किसी भी वार्ता का आधार केवल यूक्रेन होना चाहिए, और यूरोप को इसमें शामिल रहना चाहिए।”

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसैन ने संदेह जताया कि क्या यह कथित US-Russia peace plan वाकई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का समर्थन प्राप्त करता है या यह केवल अटकलों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यह योजना वास्तविक है भी या नहीं।

यह स्पष्ट नहीं है कि यूरोपीय मंत्रियों के पास उन प्रस्तावों की वास्तविक जानकारी है या नहीं, जिनमें कथित तौर पर यूक्रेन को कुछ क्षेत्र छोड़ने की बात कही गई है। राष्ट्रपति जेलेंस्की पहले ही इस तरह के किसी भी प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर चुके हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि अमेरिका “एक स्थायी शांति समाधान” पर विचार कर रहा है और दोनों पक्षों को “कठिन लेकिन आवश्यक समझौते” करने होंगे।
उधर, क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ कोई औपचारिक वार्ता नहीं हो रही है, सिर्फ “संपर्क” हुए हैं जिन्हें बातचीत नहीं कहा जा सकता।