ED Raid on Online Betting Network: देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और कई अन्य शहरों में व्यापक छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने कथित 1000 करोड़ रुपये के ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग नेटवर्क से जुड़े करीब 18 ठिकानों पर एक साथ रेड डाली। इस लंबे ऑपरेशन के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई गुरुवार सुबह शुरू हुई और देर रात तक चली। जांच के दौरान एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। माना जा रहा है कि ये सबूत ऑनलाइन सट्टेबाजी और उससे जुड़े पैसों के लेन-देन के नेटवर्क को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
तीन आरोपी गिरफ्तार, कई डिजिटल सबूत जब्त
ईडी द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दीपक सिंह अहलावत, पृथ्वी कुमार और विकास तनेजा शामिल हैं। जानकारी के अनुसार दीपक सिंह अहलावत हरियाणा का रहने वाला है जबकि पृथ्वी कुमार उत्तराखंड से संबंध रखता है।
जांच एजेंसी का कहना है कि यह पूरा मामला ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए बड़े स्तर पर कथित अवैध सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। ईडी के बेंगलुरु रीजनल ऑफिस ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। कार्रवाई के दायरे में मेसर्स गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशक और मामले से जुड़े कई अन्य संदिग्ध शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच के दौरान एजेंसी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, बैंकिंग रिकॉर्ड और कई डिजिटल डाटा स्टोरेज डिवाइस जब्त किए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से पूरे नेटवर्क के संचालन और पैसों के ट्रांजैक्शन की परतें खुल सकती हैं।
FIR के बाद ED ने संभाली जांच
अधिकारियों के अनुसार इस मामले में सबसे पहले बेंगलुरु के विभिन्न पुलिस थानों में कई प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। शुरुआती जांच में ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए अवैध गतिविधियों और आर्थिक गड़बड़ियों की बात सामने आई थी। इसके बाद मामला धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत ईडी को सौंपा गया।
ईडी ने FIR और वित्तीय लेन-देन के आधार पर अपनी जांच शुरू की और संदिग्ध कंपनियों तथा उनसे जुड़े लोगों पर नजर रखी। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित सट्टेबाजी से कमाए गए पैसे को किस तरह अलग-अलग माध्यमों से सफेद बनाया गया।
पिछले साल भी हुई थी बड़ी छापेमारी
यह पहली बार नहीं है जब इस नेटवर्क को लेकर ईडी ने कार्रवाई की हो। इससे पहले पिछले वर्ष नवंबर में भी एजेंसी ने बेंगलुरु और गुरुग्राम में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी।
उस दौरान मेसर्स निर्देश नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड (NNPL) और मेसर्स गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (GTPL) के कार्यालयों के साथ-साथ उनके निदेशकों और अन्य संदिग्धों के घरों की तलाशी ली गई थी।
ईडी की जांच कर्नाटक पुलिस की शिकायतों के आधार पर शुरू हुई थी। आरोप लगाया गया था कि एनएनपीएल द्वारा संचालित गेमिंग प्लेटफॉर्म “Pocket52” में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही थीं।
गेमिंग प्लेटफॉर्म पर लगे गंभीर आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक गेमिंग प्लेटफॉर्म पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इनमें खेल के परिणामों में कथित हेरफेर, खिलाड़ियों के बीच मिलीभगत, तकनीकी खामियां और पैसे निकालने में बाधाएं शामिल थीं।
इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता की कमी और यूजर्स के साथ धोखाधड़ी जैसे आरोप भी सामने आए थे। एजेंसियों का मानना है कि इन गतिविधियों के जरिए भारी मात्रा में अवैध धन का लेन-देन किया गया।
ऑनलाइन बेटिंग पर बढ़ती सख्ती
हाल के वर्षों में देश में ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म्स का तेजी से विस्तार हुआ है। इसके साथ ही अवैध सट्टेबाजी, साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले भी बढ़े हैं। यही वजह है कि केंद्रीय एजेंसियां अब ऐसे नेटवर्क्स पर लगातार सख्ती कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग के बीच की सीमा कई बार धुंधली हो जाती है, जिसका फायदा अवैध नेटवर्क उठाते हैं। ऐसे में नियमन और निगरानी को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।

