Donald Trump Iran Warning: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर ईरान को लेकर बेहद आक्रामक बयान दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका चाहे तो “पूरे ईरान को एक ही रात में खत्म कर सकता है” और यह कार्रवाई “कभी भी, यहां तक कि कल भी” हो सकती है। उनके इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है।
ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि यदि ईरान तय समयसीमा के भीतर झुकता नहीं है, तो उसके असैन्य बुनियादी ढांचे—जैसे पुल, बिजली संयंत्र और अन्य महत्वपूर्ण ढांचे—को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने यहां तक कह दिया कि उन्हें इस तरह के हमलों को लेकर युद्ध अपराधों की कोई चिंता नहीं है, जो इस बयान को और भी गंभीर बना देता है।
डेडलाइन और होर्मुज पर दबाव
व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने ईरान को मंगलवार रात 8 बजे तक का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि अगर इस समयसीमा तक ईरान ने आत्मसमर्पण नहीं किया या रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला, तो अमेरिका बड़े पैमाने पर हमले करेगा।
यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जिस पर नियंत्रण को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। अमेरिका का मानना है कि इसका खुला रहना अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है।
रक्षा मंत्रालय की चेतावनी
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने भी स्थिति की गंभीरता को बढ़ाते हुए कहा कि आने वाले दिनों में हमले और तेज हो सकते हैं। उनके मुताबिक, “आज हमले ज्यादा होंगे और कल उससे भी ज्यादा।” इस बयान से साफ है कि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज करने की तैयारी में है।
ईरान का रुख सख्त
वहीं, ईरान ने 45 दिनों के प्रस्तावित युद्धविराम को खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे केवल अस्थायी युद्धविराम नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहते हैं। काहिरा स्थित ईरानी मिशन के प्रमुख मुज्तबा फरदौसी पोर ने कहा कि ईरान तब तक किसी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, जब तक यह गारंटी न दी जाए कि भविष्य में उस पर दोबारा हमला नहीं होगा।
ईरान की सरकारी एजेंसी ‘इरना’ के अनुसार, तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को अपना जवाब भेज दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन सहमति अभी दूर है।
इजराइल के हमले और बढ़ता संघर्ष
इस बीच Israel ने भी ईरान पर बड़े हमले किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र स्थित एक प्रमुख पेट्रो-केमिकल प्लांट को निशाना बनाया गया, जिससे वहां भारी नुकसान हुआ। इस हमले में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक वरिष्ठ कमांडर की मौत भी हो गई।
इजराइली रक्षा मंत्री Israel Katz ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे “ईरान के सबसे बड़े ऊर्जा ढांचे पर बड़ा हमला” बताया। साउथ पार्स दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में से एक है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलता है।
जवाबी हमले और बढ़ता खतरा
इजराइल और अमेरिका के हमलों के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। ईरानी मिसाइलों ने इजराइल के उत्तरी शहर हाइफा को निशाना बनाया, जिससे कई लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा, खाड़ी देशों—कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब—ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रख दिया है।
तेहरान और अन्य शहरों में लगातार हो रहे हवाई हमलों से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दे रही हैं और भारी तबाही की खबरें सामने आ रही हैं।
तेल बाजार पर असर
इस पूरे संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो युद्ध शुरू होने के समय से लगभग 50% अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है, जिससे दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होंगी।
कूटनीतिक प्रयास जारी
तनाव के बीच मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये जैसे देशों ने मध्यस्थता करते हुए एक नया युद्धविराम प्रस्ताव पेश किया है। हालांकि, ईरान ने फिलहाल इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इसके बावजूद कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, ताकि इस संघर्ष को और बढ़ने से रोका जा सके।

