Veg Nonveg Thali: सस्ती हुई नॉन-वेज थाली, CRISIL रिपोर्ट में खुलासा

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Veg Nonveg Thali: बढ़ती महंगाई और वैश्विक तनाव के बीच आम लोगों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में घर पर बनने वाली नॉन-वेज थाली की कीमत में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि शाकाहारी थाली की लागत लगभग स्थिर बनी हुई है। यह जानकारी CRISIL की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है, जिसने उपभोक्ताओं को कुछ हद तक राहत दी है।

CRISIL रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?

CRISIL Intelligence की ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में नॉन-वेज थाली की लागत में साल-दर-साल आधार पर करीब 1% की गिरावट आई है। वहीं, वेज थाली की कीमत लगभग स्थिर बनी रही, यानी उसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया।

यह रिपोर्ट देश के विभिन्न हिस्सों—उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत—में खाद्य वस्तुओं की कीमतों के विश्लेषण पर आधारित है। इसमें अनाज, दाल, सब्जियां, ब्रॉयलर चिकन, मसाले और ईंधन जैसी आवश्यक चीजों के दामों को ध्यान में रखकर थाली की औसत लागत का अनुमान लगाया गया है।

महंगाई के बीच कैसे मिला संतुलन?

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च के दौरान कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट ने बढ़ती महंगाई के असर को काफी हद तक संतुलित किया। खासकर आलू, प्याज और दालों के सस्ते होने से कुल खर्च पर दबाव कम हुआ।

हालांकि, इस दौरान टमाटर की कीमतों में करीब 33% तक उछाल आया, वहीं कुकिंग गैस की कीमत लगभग 14% और खाद्य तेल करीब 6% महंगा हुआ। इसके बावजूद सस्ती सब्जियों ने इन बढ़ोतरी के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया।

नॉन-वेज थाली सस्ती क्यों हुई?

नॉन-वेज थाली के सस्ता होने के पीछे एक बड़ा कारण ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में गिरावट है। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में चिकन की कीमतों में करीब 2% की कमी आई। विशेषज्ञों का मानना है कि नवरात्रि के दौरान मांसाहारी भोजन की मांग कम हो जाती है, जिससे चिकन की कीमतों पर दबाव पड़ता है।

इसके अलावा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पोल्ट्री कंपनियों और रिटेलर्स के बीच मार्जिन को लेकर हुए विवाद ने भी चिकन की कीमतों को नीचे लाने में योगदान दिया। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिला, जिससे नॉन-वेज थाली थोड़ी सस्ती हो गई।

आलू-प्याज ने दी बड़ी राहत

मार्च महीने में आलू और प्याज की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार, आलू लगभग 13% और प्याज करीब 25% तक सस्ता हुआ। इसकी मुख्य वजह बाजार में इन फसलों की बंपर आवक रही।

साथ ही, निर्यात में आई बाधाओं के चलते घरेलू बाजार में स्टॉक बढ़ गया, जिससे कीमतों में गिरावट आई। कोल्ड स्टोरेज और मंडियों से पुराने स्टॉक के बाहर आने से भी कीमतों में नरमी बनी रही। इन दोनों सब्जियों के सस्ते होने से आम आदमी की थाली का खर्च काफी हद तक कम हुआ।

आम आदमी को कितनी राहत?

कुल मिलाकर, इस रिपोर्ट से यह साफ होता है कि भले ही वैश्विक स्तर पर तनाव और महंगाई का दबाव बना हुआ है, लेकिन कुछ जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई गिरावट ने आम उपभोक्ताओं को राहत दी है।

थाली की लागत में स्थिरता या हल्की गिरावट का मतलब है कि रोजमर्रा के खर्च में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई, जो आम परिवारों के लिए अच्छी खबर है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए यह राहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतें मौसम, उत्पादन और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी। अगर सब्जियों और अनाज की आपूर्ति अच्छी बनी रहती है, तो थाली की कीमतों में स्थिरता बनी रह सकती है।

हालांकि, ईंधन और खाद्य तेल जैसी वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर आगे भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में सरकार और बाजार दोनों की भूमिका अहम होगी, ताकि आम आदमी पर महंगाई का बोझ ज्यादा न बढ़े।