Cement Price Hike: अगर आप नया घर बनाने की योजना बना रहे हैं, तो आने वाले समय में आपका बजट बढ़ सकता है। भारत में सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध का असर अब भारतीय सीमेंट उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। बढ़ती पैकेजिंग लागत, महंगे ईंधन और परिवहन खर्च के कारण सीमेंट कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
UltraTech Cement समेत कई बड़ी कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है और इसका असर जल्द ही बाजार में सीमेंट की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण प्लास्टिक और पॉलिमर आधारित पैकेजिंग सामग्री महंगी हो गई है।
सीमेंट कंपनियां मुख्य रूप से प्लास्टिक बैग्स में सीमेंट की पैकेजिंग करती हैं। इन बैग्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर सीधे तौर पर पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े होते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर सीमेंट उद्योग पर पड़ रहा है।
अल्ट्राटेक सीमेंट के मुख्य वित्तीय अधिकारी Atul Daga ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बाद पॉलिमर और प्लास्टिक कच्चे माल की कीमतों में लगभग 70 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। सप्लाई चेन बाधित होने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों की लागत तेजी से बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि केवल मार्च तिमाही में ही कंपनी को पैकेजिंग बैग्स पर लगभग 90 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। हालांकि फिलहाल बैग्स की उपलब्धता में कोई कमी नहीं है, लेकिन उनकी बढ़ती कीमतों ने उत्पादन लागत पर भारी दबाव डाल दिया है।
अल्ट्राटेक देशभर में लगभग 150 सप्लायर्स के साथ काम करती है। बड़ी मात्रा में खरीदारी के कारण कंपनी की मोलभाव करने की क्षमता मजबूत रहती है, लेकिन इसके बावजूद लागत में आई तेज वृद्धि को पूरी तरह नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है। इसी वजह से अब कंपनियां लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं ताकि कीमतों में अचानक होने वाले बदलाव का असर कम किया जा सके।
पैकेजिंग लागत के अलावा ईंधन और मालभाड़ा भी लगातार महंगा हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहा तो परिवहन लागत और बढ़ सकती है। सीमेंट उद्योग में लॉजिस्टिक्स का खर्च काफी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि सीमेंट को बड़े पैमाने पर देशभर में पहुंचाया जाता है।
जानकारों का कहना है कि मार्च तिमाही में सीमेंट की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है और आने वाले महीनों में एक और मूल्य वृद्धि देखने को मिल सकती है। इसका सीधा असर घर बनाने वाले लोगों, बिल्डर्स और रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ेगा।
मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि घर निर्माण में सीमेंट सबसे जरूरी सामग्री में से एक है। सीमेंट के दाम बढ़ने से निर्माण लागत भी तेजी से बढ़ सकती है, जिससे मकान बनाना और महंगा हो जाएगा।
बढ़ती लागत के बावजूद अल्ट्राटेक सीमेंट अपनी विस्तार योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027-28 तक अपनी उत्पादन क्षमता 24 करोड़ टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हर साल 8,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये तक निवेश की योजना बनाई गई है।
कंपनी को उम्मीद है कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग और शहरीकरण की बढ़ती मांग के कारण सीमेंट की खपत आने वाले वर्षों में मजबूत बनी रहेगी। हालांकि फिलहाल उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो सीमेंट की कीमतों में जल्द ही और बढ़ोतरी हो सकती है।

