भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते से यूरोप में पाकिस्तान की बढ़त खत्म

EU Pakistan trade: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी को नई दिल्ली में लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए। करीब 20 वर्षों की बातचीत के बाद हुए इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है। यह करार दो ऐसे आर्थिक समूहों को जोड़ता है, जो मिलकर दुनिया की लगभग 25% GDP, करीब एक चौथाई वैश्विक आबादी और लगभग 2 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

जहां भारत में इस समझौते को ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है, वहीं पाकिस्तान में इसे लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है। पाकिस्तान ने स्वीकार किया है कि भारत–EU व्यापार समझौते के बाद उसके निर्यात पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर वह यूरोपीय संघ के अधिकारियों के संपर्क में है।

भारत–EU समझौते से पाकिस्तान क्यों चिंतित है

बीते कई वर्षों से पाकिस्तान को यूरोपीय बाजार में GSP+ (जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस) का लाभ मिलता रहा है। इस व्यवस्था के तहत पाकिस्तान को अपने करीब 66% निर्यात उत्पादों पर शून्य शुल्क की सुविधा मिली हुई थी। खास तौर पर टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र में इससे पाकिस्तान को भारत पर बड़ी बढ़त हासिल थी।

दूसरी ओर, भारतीय निर्यातकों को इसी तरह के उत्पादों पर 9% से 12% तक शुल्क चुकाना पड़ता था। इसके बावजूद भारत के टेक्सटाइल निर्यात 5.6 अरब डॉलर तक पहुंच गए थे, जबकि पाकिस्तान का निर्यात 6.2 अरब डॉलर के आसपास रहा।

अब भारत–EU FTA के बाद यह समीकरण पूरी तरह बदलने जा रहा है। समझौते के लागू होते ही भारत को यूरोपीय संघ में व्यापक ड्यूटी-फ्री पहुंच मिल जाएगी, जिससे पाकिस्तान की वर्षों पुरानी टैरिफ बढ़त लगभग समाप्त हो जाएगी। इस बीच पाकिस्तान का GSP+ दर्जा, जो 2014 में दिया गया था, दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाला है, और इसके आगे बढ़ने की कोई गारंटी नहीं है।

पाकिस्तान के लिए दोहरी चुनौती

यूरोपीय संघ पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ऐसे में वहां की कारोबारी दुनिया को डर है कि भारत के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा में पाकिस्तान अपनी पकड़ खो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान के सामने अब दोहरी मार है—एक तरफ भारत को FTA के जरिए सीधा फायदा मिल रहा है, दूसरी ओर पाकिस्तान खुद अपनी GSP+ सुविधा खोने के खतरे से जूझ रहा है।

ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के प्रमुख कामरान अरशद ने कहा कि भारत अब यूरोपीय बाजार में कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गया है और कई क्षेत्रों में पाकिस्तान की GSP+ बढ़त को पीछे छोड़ रहा है।

वहीं, FPCCI के उपाध्यक्ष और बिजनेसमैन पैनल प्रोग्रेसिव के चेयरमैन साकिब फैयाज मगून ने चेतावनी दी कि जैसे ही भारत को EU में शून्य-शुल्क पहुंच मिलती है, पाकिस्तान का फायदा खत्म हो जाएगा और निर्यात को भारी नुकसान हो सकता है। उनके मुताबिक, एक बार बाजार हाथ से निकल गया तो दोबारा उसमें वापसी बेहद मुश्किल होती है।

सरकार और पूर्व मंत्री की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि GSP+ योजना पाकिस्तान और EU दोनों के लिए फायदेमंद रही है। इससे यूरोपीय उपभोक्ताओं को सस्ते टेक्सटाइल और परिधान मिलते रहे हैं और पाकिस्तान को स्थिर निर्यात बाजार मिला है। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा रणनीतिक संवाद और ब्रुसेल्स में EU अधिकारियों के साथ बातचीत में उठाया गया है।

हालांकि पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री डॉ. गोहर एजाज ने इस पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान की EU के साथ “शून्य-शुल्क हनीमून” अब खत्म हो चुकी है और करीब 1 करोड़ नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। उन्होंने सरकार से ऊर्जा, टैक्स और फाइनेंसिंग लागत को क्षेत्रीय स्तर के बराबर लाने की मांग की।

भारत को क्या फायदा होगा

भारत–EU FTA लागू होने के बाद भारत के करीब 95% श्रम-प्रधान निर्यात—जैसे टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स और लेदर उत्पाद—यूरोपीय संघ में बिना शुल्क के पहुंच सकेंगे। इसके साथ ही यूरोप से भारत आने वाली लक्ज़री कारें और वाइन भी अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, यह समझौता न सिर्फ भारत और EU के व्यापारिक रिश्तों को नया आयाम देगा, बल्कि दक्षिण एशिया के व्यापार संतुलन को भी नए सिरे से परिभाषित करता नजर आ रहा है।