Bangladesh News: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। अंतरिम सरकार द्वारा लिए गए हालिया फैसलों ने न केवल राजनीतिक दलों, बल्कि आम जनता और विशेषज्ञों के बीच भी तीखी बहस छेड़ दी है। राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली इस अंतरिम सरकार से अपेक्षा की जा रही थी कि वह केवल निष्पक्ष चुनाव कराने और दैनिक प्रशासनिक कार्यों तक ही सीमित रहेगी, लेकिन हाल के निर्णयों ने उसकी भूमिका और अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे अधिक विवाद सिविल सेवकों के लिए 9वें वेतन आयोग (नेशनल पे कमीशन–2025) के गठन को लेकर है। इस आयोग द्वारा सरकारी कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी की सिफारिशें किए जाने की संभावना जताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि यह फैसला आने वाली निर्वाचित सरकार पर भारी वित्तीय बोझ डालेगा, खासकर ऐसे समय में जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से दबाव में है और राजकोषीय घाटा चिंता का विषय बना हुआ है।
हालांकि सरकारी कर्मचारियों के कुछ संगठन इस कदम का समर्थन कर रहे हैं और इसे लंबे समय से लंबित मांगों की पूर्ति बता रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या चुनाव से ठीक पहले इस तरह का बड़ा आर्थिक निर्णय लेना उचित है। इसी कड़ी में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियों को तेजी से आगे बढ़ाया जाना भी विवाद का कारण बना है। आलोचक इसे चुनावी लाभ साधने की कोशिश मान रहे हैं, जबकि शिक्षकों के संगठन वेतन विसंगतियों और पदोन्नति से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं और 10वीं ग्रेड तक वेतनमान बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
एक और बड़ा फैसला मंत्रियों और वरिष्ठ नौकरशाहों के लिए ढाका के मंत्री इलाक़े में 72 बड़े फ्लैटों के निर्माण से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि इन फ्लैटों का आकार आम नागरिकों के घरों से कई गुना बड़ा होगा। विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इस योजना को “फिजूलखर्ची और विलासिता” करार दिया है। उनका कहना है कि जब देश की बड़ी आबादी महंगाई, बेरोजगारी और भोजन की कमी से जूझ रही है, तब इस तरह की योजनाएं जनता की भावनाओं के विपरीत हैं।
इसके अलावा, चट्टोग्राम बंदरगाह से जुड़े कुछ समझौते, मिरसाराई आर्थिक ज़ोन में हथियार उत्पादन क्षेत्र की घोषणा और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) के लिए 163 नए वाहन खरीदने के फैसले भी आलोचना के घेरे में हैं। विरोधी दलों का आरोप है कि ये सभी निर्णय दूरगामी प्रभाव वाले हैं और अंतरिम सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हैं। उनका कहना है कि ऐसे फैसलों से अगली निर्वाचित सरकार के लिए नीतिगत और आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
राजनीतिक आलोचकों का यह भी दावा है कि कुछ कदम राष्ट्रीय हितों की बजाय घरेलू और विदेशी प्रभावशाली समूहों के पक्ष में लिए जा रहे हैं। इस बीच, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सरकार से निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की मांग की है और अंतरिम प्रशासन से आग्रह किया है कि वह स्वयं को अस्थायी भूमिका तक ही सीमित रखे।
चुनावी हिंसा, मानवाधिकार उल्लंघन और सामाजिक तनाव की बढ़ती घटनाओं ने भी हालात को और संवेदनशील बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरिम सरकार पर पक्षपात या अधिकारों के अतिक्रमण के आरोप बढ़ते रहे, तो इससे चुनाव की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोनों पर असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन आलोचनाओं का कैसे जवाब देती है और क्या वह विवादित फैसलों पर पुनर्विचार करती है या नहीं।

