Afghanistan Airstrike: बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) ने पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए कथित हवाई हमलों की कड़ी आलोचना करते हुए अफगानिस्तान के समर्थन का ऐलान किया है। संगठन ने इन हमलों को अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है। BNM का कहना है कि किसी भी देश की सीमा के भीतर इस तरह की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और पड़ोसी संबंधों के सिद्धांतों के खिलाफ है।
अफगानिस्तान के Ministry of National Defence के मुताबिक पाकिस्तान ने नंगरहार और पक्तिका प्रांतों के रिहायशी इलाकों में हवाई हमले किए। स्थानीय सूत्रों के अनुसार इन हमलों में एक मदरसे को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है, जबकि कई रिहायशी घरों को भी नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि महिलाओं और बच्चों समेत दर्जनों नागरिक मारे गए या घायल हुए हैं। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Baloch National Movement ने अपने बयान में कहा कि पिछले 79 वर्षों से क्षेत्रीय अस्थिरता की मुख्य वजह पाकिस्तान की नीतियां रही हैं। संगठन ने पाकिस्तान पर विस्तारवादी और आंतरिक दमनकारी नीति अपनाने का आरोप लगाया। बयान में बलूचिस्तान के “कब्जे” और वहां राजनीतिक दमन का भी जिक्र किया गया। BNM का कहना है कि बलूचिस्तान में लंबे समय से मानवाधिकार उल्लंघन और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई होती रही है।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए पड़ोसी देशों के साथ तनाव पैदा करता है। BNM के मुताबिक इस तरह की सैन्य कार्रवाई न सिर्फ अफगानिस्तान बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा है। संगठन ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अफगानिस्तान की संप्रभुता और आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है।
BNM ने क्षेत्रीय देशों से “संयुक्त मोर्चा” बनाने की अपील की है ताकि कथित सैन्य आक्रामकता का मिलकर मुकाबला किया जा सके। संगठन का मानना है कि अगर पड़ोसी देश एकजुट होकर कूटनीतिक दबाव बनाएं, तो ऐसे घटनाक्रमों को रोका जा सकता है। साथ ही, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने और स्वतंत्र जांच की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के हमले जारी रहे तो पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंध और अधिक खराब हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच पहले से ही सीमा और सुरक्षा मुद्दों को लेकर तनाव रहा है। ऐसे में किसी भी सैन्य कार्रवाई से सीमा पर हालात और बिगड़ सकते हैं। इससे न केवल सैन्य तनाव बढ़ेगा बल्कि क्षेत्र में अस्थिरता और उग्रवाद को भी बढ़ावा मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दक्षिण एशिया पहले ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें आतंकवाद, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता शामिल हैं। ऐसे समय में पड़ोसी देशों के बीच टकराव पूरे क्षेत्र के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसलिए कूटनीतिक संवाद और आपसी समझदारी को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
फिलहाल इस मुद्दे पर दोनों देशों की ओर से आधिकारिक स्तर पर विस्तृत बातचीत या संयुक्त बयान सामने नहीं आया है। लेकिन जिस तरह से बलूच संगठनों ने खुलकर अफगानिस्तान के समर्थन में बयान दिया है, उससे यह साफ है कि यह मामला क्षेत्रीय राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

