डाक्टर संजीव कुमार का अभिनंदन कार्यक्रम हुआ आयोजित

डा. संजीव कुमार जी (मध्य में) श्री नरविजय जी (दायें) के हाथों सम्मानित होते हुए। तस्वीर में संजीव जी के एकदम दायें मनोरमा जी और बायें कामिनी जी स्थित है।
डा. संजीव कुमार जी (मध्य में) श्री नरविजय जी (दायें) के हाथों सम्मानित होते हुए। तस्वीर में संजीव जी के एकदम दायें मनोरमा जी और बायें कामिनी जी स्थित है।

नई दिल्ली।  हाल ही में 13 सितंबर 25 को मयूर विहार फेस-1 दिल्ली स्थित क्राउन प्लाजा होटल में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डा संजीव कुमार को सम्मान व पुरस्कार विभिन्न साहित्यिक और सामाजिक हस्तियों की उपस्थिति में प्रदान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन इंडिया नेटबुक्स (पब्लिकेशन) प्रा. लि. नोएडा ने किया। यह अवसर था कि डा. संजीव की 300 किताबें लिखने और प्रकाशित होने पर उन्हें इंडिया बुक आफ रिकार्ड ने यह रिकार्ड बन जाने पर दिया है। इस अवसर पर हिंदी के अनेक जाने माने साहित्यकार, लेखक उपस्थित रहे, जिनमें सर्वश्री चित्रा मुद्गल जी, ममता कालिया जी, प्रेम जनमेजय, अशोक चक्रधर, दिविक रमेश, प्रताप सहगल जी और विशिष्ट अतिथि श्री नरविजय यादव जी, जो कि इंडिया बुक आफ रिकार्ड का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। कार्यक्रम में सभी ने अपने उद्बोधन दिये।

अशोक चक्रधर जी ने हिंदी भाषा साहित्य में एआई के लाभ हानि और अधकचरी जानकारी देने को लेकर रोचक विचार रखे तो प्रताप सहगल व अन्य वरिष्ठ साहित्यकारों ने डा साहब की कर्मठता, जिजीविषा, सतत् लेखन, क्रियाशीलता और उत्कृष्ट लेखन की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इतनी अच्छी और सारगर्भित 300 पुस्तकें लिखने, प्रकाशित होने पर मंच से उन्हें बधाई दी और निरंतर सक्रियता से इसी तरह के निरंतर व निर्बाध साहित्य लेखन व उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद भी दिया। सभी उपस्थित गणमान्य अतिथियों का सहर्ष पुष्पगुच्छ और पटका प्रदान कर स्वागत किया डा. मनोरमा व कामिनी जी ने। इस मौके पर अन्य के अलावा श्री सुधाकर पाठक, शकुंतला मित्तल, विनोद पाराशर, उमंग सरीन, सविता चड्ढा, रजनी छावड़ा, राघवेश अस्थाना तथा आलोक शुक्ला जी की गरिमामयी उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

सभी ने इस अवसर पर अपने विचार प्रकट किये। इंडिया नेटबुक्स पब्लिकेशन के कर्मठ सदस्यों में सर्वश्री शुभम जी, नरेंद्र जी, राधिका जी, शैली जी, कल्पना जी, विनय जी, उपस्थित रहे। साथ ही प्रदीप शुक्ला ने इस गरिमामयी अवसर पर संक्षिप्त उद्गार प्रकट करते हुए कहा कि- इतनी बड़ी संख्या में पुस्तकें लिखने और प्रकाशित होना बहुत बड़ी उपलब्धि है। क्योंकि आम लेखक को एक पुस्तक लिखना सरल नहीं । निरंतर लिखते रहने को लेकर शुभमंगल कामनाएं दीं। इसी से संबंधित विचार इस प्रकार हैं-संजीव कुमार जी ने विभिन्न विधाओं में अब तक करीब 300 से अधिक पुस्तकें लिखकर एक कीर्तिमान रच दिया है, जोकि शायद किसी के लिए भी संभव नहीं। यह कोई आसान काम नहीं है। खास बात यह है कि हिंदी साहित्य की कोई भी विधा हो चाहे कविताएं, कहानियां, उपन्यास, व्यंग्य विधा हो या फिर बच्यों के लिए किताबें हों या कानून विषयक हों। भाषा हिंदी ही नहीं अंग्रेजी भी। आपकी ऐतिहासिक-पौराणिक केंद्रित विषयों पर भी लेखनी बहुत सधी, और शोधपरक रही है। यानी साहित्य की कोई भी विधा डॉ. साहब से अछूती नहीं रही। अनेकानेक विषयों पर लिखा है, खूब लिखा है और लगातार लेखन जारी है।

डॉ. संजीव कुमार जी की तमाम किताबों की चर्चा कर सकना यहां पर संभव नहीं है, पर बहुत ही चर्चित हैं-गांधारी, कोणार्क, खामोशी की चीखें और आज की मधुशाला। हालांकि इनके अलावा बाकी कोई भी पुस्तक किसी भी तरह से कम नहीं है। भरपूर व सार्थक पठनीय सामग्री से भरपूर यह विशाल हिंदी कोष हर प्रकार से समृद्ध है। डॉ. संजीव कुमार जी का कृतित्व जितना समृद्ध है, व्यक्तित्व भी उससे कम प्रभावी नहीं। उनकी अनुशासनप्रिय, धीर गंभीर कार्यशैली और जीवंतता सहज ही मोहित करती है। उनकी साहित्यिक लग्न व कठिन परिश्रम से भरपूर यह छवि सहज ही प्रेरणा स्रोत है। आप एक व्यवहारकुशल संपादक, श्रेष्ठ प्रकाशक, वरिष्ठ लेखक रूप में एक मजबूत व्यक्तित्व के मालिक हैं। स्टाफ के प्रति आपका बहुत ही मधुर व्यवहार सदैव हमारे लिए सहज रूप में काम करने के उचित वातावरण और ऊर्जा के संचरण मे सदा मददगार है। आप अनेकानेक प्रकाशकीय, साहित्यिक तथा लेखकीय अवदान के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी सदैव तत्पर रहते हैं।

आप जिस शिद्दत से आज हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में दिन-रात भरपूर लेखन कार्य में जुटे हैं, वह वाकई काबिलेतारीफ तो है ही साथ ही साथ वर्तमान पीढ़ी और आनेवाली नई पीढ़ी के लिए भी बहुत कुछ सीखने और सही मार्ग अपनाने में एक प्रेरणादायी है।
डॉ. संजीव कुमार साहित्य में इसी प्रकार अधिकतम लेखन करते रहें व और पुस्तकें लिखते रहें तथा हम सभी के लिए मार्गदर्शक व प्रेरणास्रोत रहें, हिंदी साहित्य की श्रीवृद्धि करते रहें तथा इस क्षेत्र में नय़े से नये कार्तिमान बनाने के साथ ही इस विधा में देश के सर्वोच्च सम्मान, पुरस्कार प्राप्त करें, मेरी यही कामना भी है। कामिनी जी ने मधुर व हर्षित वाणी में डा. संजीव कुमार जी के अनेकानेक साहित्य के साथ सामाजिक कार्यों का विस्तार से वर्णन किया। कार्यक्रम समापन पर धन्यवाद ज्ञापन डा. मनोरमा जी ने दिया।

इस कार्यक्रम का सफल संचालन किया श्री रणविजय जी ने। उन्होंने अपनी चिर-परिचित रोचक व मोहक संचालन क्षमता से दर्शकों/श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।