इंटरनेशनल डेस्क: यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र डोनेट्स्क में जंग ने एक बार फिर अपना सबसे खौफनाक रूप दिखाया है। हर दिन बमबारी, ड्रोन हमले और तोपों की गड़गड़ाहट के बीच यहां की ज़मीन पर अब इंसान से ज़्यादा खून बह रहा है। यह इलाका अब युद्ध का सबसे सक्रिय और निर्णायक मोर्चा बन चुका है, जहां हर इंच जमीन को बचाने के लिए सैकड़ों सैनिक अपनी जान दे रहे हैं। 33 वर्षीय यूक्रेनी महिला सैनिक फॉक्स अपने बंकर में बैठकर ड्रोन उड़ाती हैं, ताकि अपने बचपन के घर को एक आखिरी बार देख सकें। वह कहती हैं, “मैंने अपनी स्कूल और उस कम्युनिटी सेंटर को तबाह होते देखा, जहां मैंने कभी डांस क्लास ली थी। यह बहुत दर्दनाक है क्योंकि पूरा जीवन आंखों के सामने घूम जाता है।”
फॉक्स ने दस साल पहले हथियार उठाए थे, जब रूस समर्थित बलों ने डोनेट्स्क पर कब्जे की शुरुआत की थी। तब से लेकर आज तक यह इलाका रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष का केंद्र बना हुआ है।2014 में शुरू हुई लड़ाई अब अपने सबसे खतरनाक दौर में है। डोनेट्स्क न सिर्फ युद्ध का मैदान है, बल्कि यह दोनों देशों की रणनीतिक स्थिति का आईना भी बन गया है। यूक्रेन इस क्षेत्र का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा पहले ही खो चुका है।यह नुकसान सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि पहचान और उम्मीद का भी है।
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औद्योगिक हृदय अब मलबे में तब्दील
2014 से पहले डोनेट्स्क यूक्रेन का औद्योगिक दिल माना जाता था। यहां करीब 40 लाख लोग रहते थे, और यह इलाका देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा था। रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद यह क्षेत्र अब खंडहर में बदल चुका है। फैक्ट्रियां, खदानें और रेलवे स्टेशन अब बमों से उखड़ी ज़मीन पर बिखरे पड़े हैं। यूक्रेनी व्यवसायों को यहां से करीब 14.4 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है। अंतरराष्ट्रीय प्रवास संगठन (IOM) की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन में जितने लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं, उनमें से लगभग एक चौथाई सिर्फ डोनेट्स्क से हैं। अब यह औद्योगिक हृदयभूमि या तो रूस के कब्जे में है या युद्ध के मैदान में दबी हुई है। वापसी की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है। Donetsk war destruction
डोनेट्स्क क्यों इतना अहम है?
डोनेट्स्क 1,250 किलोमीटर लंबे मोर्चे का सबसे सक्रिय हिस्सा है। दोनों देश सर्दियों से पहले यहां बढ़त हासिल करना चाहते हैं। रूस पहले से ही डोन्बास और दक्षिणी क्षेत्रों पर कब्जा कर चुका है, जिन्हें तीन साल पहले अवैध रूप से अपने हिस्से में मिला लिया गया था। अब रूस की रणनीति बाकी बचे हिस्से पर कब्जा जमाकर यूक्रेन के अन्य हिस्सों पर राजनीतिक दबाव बनाने की है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की हाल की गतिविधियां सैन्य नहीं बल्कि राजनीतिक मंशा से प्रेरित हैं। रूस चाहता है कि यूक्रेन थक जाए, टूट जाए और आत्मसमर्पण कर दे। Donetsk war destruction
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यूक्रेन की जंग जारी
यूक्रेनी कमांडर युर्चुक कहते हैं, “इस इलाके में तेजी से हमले करने से कोई रणनीतिक फायदा नहीं है। यहां नदियां, नहरें और किलेबंद गांव हैं, जो रक्षा को मजबूत बनाते हैं।” सैनिक फॉक्स कहती हैं, “अब हम केवल एक शहर या इमारत के लिए नहीं लड़ रहे, हमारा घर अब पूरा यूक्रेन है।” यह जंग सिर्फ सीमाओं की नहीं, बल्कि जज़्बे और अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है। यूक्रेन के नए युवा सैनिक, आधुनिक तकनीक और सीमित संसाधनों के बावजूद, अपनी मातृभूमि की रक्षा में डटे हुए हैं। रूस का मकसद केवल क्षेत्रीय कब्जा नहीं, बल्कि यूक्रेन के आत्मविश्वास को तोड़ना है। लेकिन लगातार नुकसानों के बावजूद यूक्रेन की नई पीढ़ी पीछे हटने को तैयार नहीं। हर सैनिक के दिल में एक ही बात है — “अगर यह जमीन गई, तो सब कुछ खत्म हो जाएगा।” डोनेट्स्क की लड़ाई आज सिर्फ दो देशों के बीच का युद्ध नहीं, बल्कि एक राष्ट्र की जिजीविषा और हिम्मत की कहानी बन चुकी है।
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