नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर अब पाठकों को मिलेगा। हाल ही में प्रकाशित पुस्तक “भारत वर्ष की स्वर्णाभा: नरेंद्र मोदी” न सिर्फ उनकी जीवनी है, बल्कि उनके व्यक्तित्व, दर्शन और राष्ट्रनिर्माण की यात्रा का गहन विश्लेषण भी है। इसे लिखा है प्रख्यात शिक्षाविद, लेखक और चार बार सांसद रह चुके प्रो. (डॉ.) रमेश चंद्र तोमर ने। यह पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है और इसकी कीमत ₹600 रखी गई है।
बचपन से संघर्ष की कहानी
नरेंद्र मोदी का बचपन साधारण परिवार में बीता। उनके पिता गुजरात के वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे, और बालक नरेंद्र अक्सर उनकी मदद करते थे। इस संघर्षपूर्ण बचपन को पुस्तक के दूसरे अध्याय में विस्तार से बताया गया है। लेखक ने विशेष रूप से मोदी और उनकी मां हीराबेन के रिश्ते का जिक्र किया है, जिसमें मां के संस्कार और आशीर्वाद को मोदी के व्यक्तित्व निर्माण का आधार बताया गया है।
डॉ. तोमर लिखते हैं कि यह संबंध केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि मातृत्व से मिली करुणा और संवेदनशीलता ने मोदी को ऐसा नेता बनाया, जो कठोर निर्णय लेते हुए भी मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखते हैं।
राजनीति और अध्यात्म का अद्भुत संतुलन
लेखक का मानना है कि नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी राजनीति और अध्यात्म का संगम है। आमतौर पर राजनीति और अध्यात्म को अलग-अलग क्षेत्रों में देखा जाता है, लेकिन मोदी के लिए दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
किताब की प्रस्तावना में मोदी को “धर्मरक्षक” के रूप में दर्शाया गया है। एक अध्याय में उन्हें “कलियुग के हनुमान” की उपाधि दी गई है, जो राम मंदिर निर्माण के उनके प्रयासों से जुड़ा है। लेखक का कहना है कि मोदी ने साबित किया है कि शासन और आध्यात्मिकता परस्पर विरोधी नहीं हैं। यही कारण है कि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि कर्मयोगी और प्रेरणास्रोत के रूप में देखे जाते हैं।
निर्णायक फैसलों से बदला देश का चेहरा
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में लिए गए बड़े फैसलों पर भी यह पुस्तक विशेष रोशनी डालती है। इनमें प्रमुख हैं:
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अनुच्छेद 370 का हटाया जाना: जिसने जम्मू-कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया।
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राम मंदिर निर्माण: दशकों पुराने मुद्दे को हल कर देश की धार्मिक आस्था को सम्मान देना।
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नोटबंदी और जीएसटी: आर्थिक सुधारों की दिशा में साहसी कदम।
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कोविड-19 महामारी प्रबंधन: वैक्सीन उत्पादन से लेकर “वैक्सीन मैत्री” तक, मोदी के नेतृत्व ने भारत को विश्व पटल पर महत्वपूर्ण भूमिका दिलाई।
लेखक लिखते हैं कि इन फैसलों ने मोदी को ऐसा नेता बनाया है, जो कठिन परिस्थितियों में भी साहसिक निर्णय लेने से पीछे नहीं हटते।
वैश्विक मंच पर भारत की पहचान
डॉ. तोमर का कहना है कि मोदी का विज़न केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। उन्होंने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।
जी-20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता हो, या संयुक्त राष्ट्र में भारत की मजबूत उपस्थिति — हर जगह मोदी ने भारत को निर्णायक शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। पुस्तक में विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया गया है, जब संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया। इसे लेखक भारत की वैश्विक जिम्मेदारी और मोदी की दूरदर्शिता का उदाहरण मानते हैं।
“प्रधान सेवक” की अवधारणा
इस पुस्तक में नरेंद्र मोदी को केवल प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि “प्रधान सेवक” बताया गया है। लेखक का तर्क है कि मोदी खुद को हमेशा जनता का सेवक मानते हैं। चाहे “स्वच्छ भारत अभियान” हो, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” हो, या डिजिटल इंडिया जैसी योजनाएं — हर जगह उनकी सोच सेवा और जनभागीदारी पर केंद्रित रही है।
इस दृष्टिकोण ने उन्हें जनता से सीधा जुड़ाव दिलाया है। यही कारण है कि वे देश की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली बने हुए हैं।
इंदिरा गांधी और स्वामी विवेकानंद से तुलना
पुस्तक में एक दिलचस्प तुलना की गई है। एक ओर, मोदी को इंदिरा गांधी जैसा कठोर और दृढ़निश्चयी बताया गया है, जो दुश्मन पर करारा प्रहार करने में सक्षम हैं। दूसरी ओर, उनके विचारों को स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं से जोड़ा गया है।
लेखक लिखते हैं कि मोदी के निर्णय भारतीय संस्कृति और राष्ट्रहित के बीच अद्भुत संतुलन का उदाहरण हैं। यह तुलना उन्हें केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि युगपुरुष के रूप में प्रस्तुत करती है।
लेखक की भाषा और दृष्टिकोण
प्रो. (डॉ.) रमेश चंद्र तोमर न केवल अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं, बल्कि शिक्षा और साहित्य जगत में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। उनकी लेखन शैली सहज और सरल है। इस पुस्तक में उन्होंने वैज्ञानिक विश्लेषण और साहित्यिक संवेदनशीलता का संतुलन बनाए रखा है।
लेखक न तो मोदी की आंख मूंदकर प्रशंसा करते हैं और न ही उन्हें केवल राजनीतिक घटनाओं तक सीमित रखते हैं। इसके बजाय, वे उन्हें एक संवेदनशील पुत्र, दृढ़ नेता, और आध्यात्मिक व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
प्रेरणा और दर्शन की जीवंत झलक
“भारत वर्ष की स्वर्णाभा: नरेंद्र मोदी” केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन दर्शन और राष्ट्र निर्माण की यात्रा का गहन विश्लेषण है। यह पुस्तक छात्रों, शोधार्थियों और सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी है।
लेखक का यह प्रयास बताता है कि मोदी केवल एक राजनीतिक चेहरा नहीं, बल्कि एक कर्मयोगी और युगपुरुष हैं, जिनका उद्देश्य भारत को नए युग की ओर ले जाना है।

