Jhandewalan mandir : झण्डेवाला देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र मेला आज सोमवार 22. 09. 2025 से आरंभ हो गया है जो 01. 10. 2025 तक चलेगा।

Jhandewalan mandir : झण्डेवाला देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र मेला आज सोमवार 22. 09. 2025 से आरंभ हो गया है जो 01. 10. 2025 तक चलेगा।
Jhandewalan mandir : झण्डेवाला देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र मेला आज सोमवार 22. 09. 2025 से आरंभ हो गया है जो 01. 10. 2025 तक चलेगा।

Jhandewalan mandir : आज नवरात्र के प्रथम दिन माँ भगवती के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की आराधना व पूजा अर्चना पूर्ण विधि – विधान के साथ की गई । पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण इन्हे शैलपुत्री नाम से अभिहित किया गया है।

प्रात: 4:00 बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंदिर परिसर माँ के जयकारों से गूंज उठा । हजारों उपस्थित भक्तों ने माँ झंडेवाली का जयघोष किया l मंदिर प्रबंधन ने आने वाले भक्तों की सुविधा को ध्यान मे रखते हुए व्यापक प्रबंध किये हैं, जिन में मुख्यतः रानी झाँसी मार्ग, पुराना नाज सिनेमा व फ्लैटिड फैक्ट्री कोम्पलेक्स में भक्तों के वाहन खड़े करने की निःशुल्क व्यवस्था की है। छ: स्थानों पर भक्तों के लिये जूता स्टैंड बनाये गये हैं । सुरक्षा व्यवस्था व्यापक रूप से की गयी है। पूरे परिसर व आसपास पास 290 सीसीटीवी कैमरे लगाए गये है। मंदिर परिसर व आसपास के क्षेत्र की सज्जा भी आकर्षण का केंद्र है l

भक्तों को लाइनों मे कोई असुविधा न हो उसके लिए लाइनों मे पट्टियाँ बिछायी गई हैं व बहुत ही सुंदर व मधुर संगीत की व्यवस्था की गई है l

प्रातः 4-00 बजे व सायँ: 7-00 बजे आरती के द्वारा माँ झण्डेवाली की पूजा-अर्चना की गई, जिस का सीधा प्रसारण मंदिर यू-टयूब चैनल, फेसबुक व मंदिर की वैबसाइट पर किया गया। बाहर से प्रसाद, फूलमाला व किसी अन्य वस्तु लाने की मनाही है। आने वाले हर भक्त को निकासी द्वार पर माँ के भण्डारे का प्रसाद दिया जाता है ।

आज विभिन्न कीर्तन मंडलियों द्वारा मुख्य प्रांगण में माँ का गुणगान किया गया। दर्शनों के लिए आने वाले भक्तों की सुविधा के लिये मंदिर का चिकित्सा विभाग भी कार्यरत है जहां पर दक्ष चिकित्सकों द्वारा सेवा 24 घन्टे उपलब्ध है l

भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर की ओर से online दर्शन बुकिंग की व्यव्स्था भी की गई है जिसे वे मंदिर की वैबसाइट व ऐप से बुक कर सकते हैं और अपने निर्धारित समय पर विषेश प्रवेश द्वार से सीधे मंदिर में प्रवेश करते हैं।

मंदिर में खोया-पाया विभाग भी कार्यरत है जो आने वाले भक्तों को बिछुड गये परिजनों से मिलवाने व खोये या पाए सामान की जानकारी प्राप्त करवाता है ।