Bangladesh Violence: बांग्लादेश में फिर बढ़ी हिंसा शरियतपुर में हिंदू दवा विक्रेता पर भीड़ का बर्बर हमला

Bangladesh Violence
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Bangladesh Violence: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं। ताज़ा घटना शरियतपुर ज़िले से सामने आई है, जहाँ 50 वर्षीय हिंदू दवा विक्रेता खोकन दास पर भीड़ ने बेरहमी से हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि यह घटना 31 दिसंबर की रात हुई, जब वे दुकान बंद कर घर लौट रहे थे।

पीड़ित के परिजनों के अनुसार, रास्ते में अचानक कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन पर पहले धारदार हथियारों से वार किए गए, फिर लाठियों से बुरी तरह पीटा गया। आरोप है कि हमलावर यहीं नहीं रुके—उन्होंने उनके शरीर पर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश भी की। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह उनकी जान बच पाई।

खोकन दास गंभीर रूप से घायल हैं और फिलहाल एक स्थानीय अस्पताल में उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें कई जगह गहरे घाव आए हैं और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अब तक हमलावरों के खिलाफ स्पष्ट या निर्णायक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे स्थानीय समुदाय में असुरक्षा और नाराज़गी दोनों बनी हुई है।

पिछले मामलों ने बढ़ाई चिंता

यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह ज़िले के भालुका क्षेत्र में दीपू चंद्र दास नामक हिंदू गारमेंट वर्कर की भीड़ ने ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। उन्हें पेड़ से लटकाकर आग के हवाले कर दिया गया था। बाद की जांच में आरोप निराधार पाए गए और कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन उस घटना ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

इसी तरह, 28 दिसंबर के आसपास पिरोज़पुर ज़िले के दुमरितला गांव और चट्टोग्राम के रावजान क्षेत्र में भी हिंदू परिवारों के घरों को निशाना बनाया गया। आरोप है कि कुछ तत्वों ने घरों में आग लगाने की कोशिश की और कई परिवारों को अंदर बंद कर दिया। सौभाग्य से लोग समय रहते बाहर निकल आए और बड़ी जनहानि टल गई।

समुदाय में भय और प्रशासन पर सवाल

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने हिंदू समुदाय के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने के लिए कड़े और ठोस कदम उठाए जाना जरूरी है। वहीं प्रशासन का दावा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह के हमले सामने आ रहे हैं, वे केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक सद्भाव के लिए भी चुनौती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि संवेदनशील मामलों में अफवाहें हिंसा भड़का देती हैं, इसलिए समय रहते सटीक जानकारी और सख्त कार्रवाई दोनों ज़रूरी हैं।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और क्या कदम उठाए जाने चाहिए।