भारत सरकार के उर्वरक विभाग ने वर्ष 2026 के पहले दिन एक ऐतिहासिक पहल करते हुए लगभग ₹2 लाख करोड़ की वार्षिक उर्वरक सब्सिडी को पूरी तरह डिजिटल करने का निर्णय लिया है। अब सब्सिडी का भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता, गति और निगरानी—तीनों में बड़ा सुधार होगा।
इस महत्त्वपूर्ण अभियान की औपचारिक शुरुआत केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन से की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। उनके अनुसार, उर्वरक क्षेत्र के पूरे इकोसिस्टम के डिजिटल होने से कंपनियों को कार्यकुशलता मिलेगी और अंततः किसानों को सीधा लाभ पहुँचेगा।
उर्वरक सचिव श्री रजत कुमार मिश्र ने बताया कि यह सुधार केवल कागजी बिलों को हटाने तक सीमित नहीं है। नई बिलिंग प्रणाली में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद तक की पूरी प्रक्रिया को एकीकृत किया गया है, जिससे हर स्तर पर निगरानी संभव होगी और उद्योग को नई गति मिलेगी।
दरअसल, उर्वरक विभाग ने अपने साथ कार्यरत सभी सार्वजनिक उपक्रमों, सहकारी संस्थाओं और निजी कंपनियों के वित्तीय लेन-देन को Integrated Financial Management System (iFMS) के माध्यम से वित्त मंत्रालय की Public Financial Management System (PFMS) से जोड़ दिया है। इस एकीकरण से भुगतान प्रक्रिया तेज और भरोसेमंद बनेगी।
भारत सरकार के उर्वरक विभाग ने साल 2026 के पहले दिन एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने लगभग दो लाख करोड़ की सालाना सब्सिडी को पूरी तरह से ऑनलाइन करने का फैसला लिया है।
इस अहम मुहिम की शुरुआत केंद्रीय मंत्री श्री @JPNadda जी ने दिल्ली के कर्तव्य भवन से की। pic.twitter.com/Mxs4upFxxW— Department of Fertilizers (@fertmin_india) January 1, 2026
मुख्य लेखा नियंत्रक (CCA) श्री संतोष कुमार ने इसे iFMS और PFMS के बीच विशिष्ट तकनीकी साझेदारी का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि इस बदलाव के बाद उर्वरक विभाग के सभी वित्तीय लेन-देन पूरी तरह डिजिटल होंगे और वरिष्ठ अधिकारी किसी भी समय सीधे मॉनिटरिंग कर सकेंगे।
संयुक्त सचिव (F&A) श्री मनोज सेठी के अनुसार, नई डिजिटल व्यवस्था से सब्सिडी बिलों के भुगतान में होने वाली देरी समाप्त होगी और साप्ताहिक आधार पर समय पर सब्सिडी जारी की जा सकेगी। ‘ई-बिल’ पोर्टल के माध्यम से खाद कंपनियाँ अब ऑनलाइन क्लेम जमा कर सकेंगी और रियल-टाइम में अपने भुगतान की स्थिति भी देख पाएंगी। इससे दफ्तरों के चक्कर और कागजी प्रक्रियाओं से मुक्ति मिलेगी।
कार्यक्रम में अपर सचिव श्रीमती अनीता सी. मेश्राम, श्रीमती अपर्णा शर्मा, संयुक्त सचिव श्री के.के. पाठक और श्री अनुराग रोहतगी सहित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी और डेवलपर उपस्थित रहे।

