बांग्लादेश में जारी राजनीतिक संक्रमण के बीच शरीफ उस्मान हादी (Osman Hadi) की मौत एक अहम मोड़ बनकर उभरी है। गुरुवार देर रात जैसे ही उनकी मौत की पुष्टि हुई, ढाका के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। यह साफ दिखा कि हादी न केवल एक विवादास्पद चेहरा था, बल्कि उसकी मौजूदगी और विचारों ने समाज को गहराई से विभाजित कर रखा था।
उस्मान हादी, जो कट्टर मंच इंक़िलाब मंचा (Inquilab Mancha) से जुड़ा एक वरिष्ठ चेहरा था, पर इस महीने की शुरुआत में ढाका के मध्य इलाके में हुए हमले में गोली लगने के बाद गंभीर रूप से घायल हो गया था। इलाज के लिए उसे सिंगापुर ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। उसकी हत्या ने न सिर्फ राजधानी को हिला दिया, बल्कि कट्टर राजनीति, राष्ट्रवाद और भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।
हादी 2024 के मध्य में हुए छात्र-नेतृत्व वाले जनआंदोलन के दौरान चर्चा में आया था। इसी आंदोलन के चलते लंबे समय से सत्ता में रहीं प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था। उस आंदोलन के भीतर हादी एक ऐसे आयोजक के रूप में पहचाना गया, जो समझौते के बजाय टकराव की नीति में विश्वास रखता था।
इंक़िलाब मंचा को उसने एक क्रांतिकारी ताकत के रूप में स्थापित करने की कोशिश की, जिसका उद्देश्य मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करना था। हालांकि इस आंदोलन को युवाओं के गुस्से और असंतोष से ऊर्जा मिली, लेकिन आलोचकों ने बार-बार इसके बढ़ते कट्टर और उग्र स्वर पर चिंता जताई।
इन्हीं चिंताओं के चलते बाद में अंतरिम प्रशासन ने इंक़िलाब मंचा को भंग कर दिया और इसे अतिवाद से जुड़ा बताते हुए सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
उस्मान हादी को अन्य नेताओं से अलग करने वाली बात थी उसका खुला भारत-विरोधी रुख। वह तथाकथित “ग्रेटर बांग्लादेश” की अवधारणा का खुलकर समर्थन करता था। इस विचार के तहत भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के बड़े हिस्सों को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाने वाले नक्शे सोशल मीडिया पर साझा किए गए।
हालांकि मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों ने इसे उकसाने वाली और अव्यावहारिक कल्पना बताया, लेकिन यह नैरेटिव ऑनलाइन तेजी से फैला और हादी को एक कट्टर भारत-विरोधी विचारक के रूप में स्थापित कर गया। विश्लेषकों के मुताबिक, इसी एजेंडे के जरिए उसने एक सीमित लेकिन मुखर समर्थक वर्ग को अपने साथ जोड़ा।
संगठन पर प्रतिबंध लगने के बावजूद, हादी ने ढाका से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में आगामी संसदीय चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले यह फैसला बेहद जोखिम भरा माना जा रहा था। प्रचार के दौरान ही वह बाइक सवार दो हमलावरों के निशाने पर आ गया।
इस हमले ने न सिर्फ एक राजनीतिक नेता को खत्म किया, बल्कि उसके समर्थकों के लिए उसे “शहीद” के प्रतीक में बदल दिया।
हत्या के बाद हालात और बिगड़ गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाए कि हमलावर भारत की ओर भाग गए, जिसके चलते भारत विरोधी नारे लगाए गए। हालांकि अब तक भारत की संलिप्तता का कोई सबूत सामने नहीं आया है, फिर भी इस मामले ने ढाका और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया।
अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस ने चेतावनी दी है कि हादी की हत्या के पीछे की ताकतें चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना चाहती हैं और उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है।
जैसे-जैसे बांग्लादेश चुनावों के करीब बढ़ रहा है, उस्मान हादी की विरासत—जो टकराव, कट्टर राष्ट्रवाद और भारत-विरोधी विचारधारा से जुड़ी रही—देश की अस्थिर राजनीतिक स्थिति को लगातार प्रभावित करती नजर आ रही है।

