अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोमवार को रूस–यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने को लेकर नई उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि शांति वार्ताएँ अब तक के सबसे उन्नत चरण में पहुँच गई हैं। यह टिप्पणी उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और कई प्रमुख यूरोपीय नेताओं के साथ विस्तृत चर्चाओं के बाद की।
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि हालिया संवादों ने शांति प्रक्रिया को काफ़ी आगे बढ़ाया है। उन्होंने ज़ेलेंस्की के साथ हुई लंबी और सकारात्मक बातचीत का ज़िक्र किया और बताया कि ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और नाटो के नेताओं के साथ हुई चर्चाओं से मतभेद कम करने में मदद मिली है। ट्रंप के अनुसार, सामूहिक कूटनीतिक प्रयासों से सभी पक्ष पहले से कहीं अधिक किसी संभावित समझौते के करीब आ गए हैं।
इसी बीच बर्लिन में उच्चस्तरीय बैठकें भी हुईं, जहाँ यूरोपीय शक्तियों ने ज़ेलेंस्की के साथ युद्ध समाप्त करने के प्रयासों को तेज़ करने पर चर्चा की। इन वार्ताओं में यूरोपीय नेताओं ने एक बहुराष्ट्रीय बल के गठन का प्रस्ताव रखा, जो भविष्य के किसी शांति समझौते को लागू कराने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही अमेरिका से मज़बूत सुरक्षा गारंटियों का समर्थन भी सुझाया गया। रूस की ओर से इन प्रस्तावों पर अभी औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बर्लिन चर्चा के बाद जारी संयुक्त बयान में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के नेताओं ने “मज़बूत सुरक्षा गारंटियों” की योजना का खाका पेश किया, जिनका उद्देश्य किसी भी युद्धविराम या शांति समझौते के उल्लंघन को रोकना बताया गया। यह युद्ध 2022 में मॉस्को द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के आक्रमण के साथ शुरू हुआ था।
ज़ेलेंस्की ने स्वीकार किया कि ट्रंप के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन इससे ठोस प्रगति भी हुई—खासतौर पर सुरक्षा आश्वासनों के मुद्दे पर। उन्होंने ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुश्नर के साथ दूसरे दिन भी बैठकें कीं और ट्रंप द्वारा पहले पेश किए गए प्रस्ताव के आधार पर चर्चा जारी रखी।
वॉशिंगटन से नए सुरक्षा आश्वासनों का स्वागत करते हुए भी ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि कुछ गंभीर मतभेद अभी बने हुए हैं, खासकर क्षेत्रीय मुद्दों पर। उन्होंने कहा कि भले ही क्षेत्रीय प्रश्नों पर व्यापक संवाद हुआ हो, लेकिन यूक्रेन से किस हद तक रियायतें मांगी जा सकती हैं—इस पर कीव और वॉशिंगटन की राय अलग है।
जर्मनी के चांसलर फ़्रेडरिक मर्ज़ ने आशावादी रुख अपनाते हुए कहा कि इन वार्ताओं ने वास्तविक शांति प्रक्रिया का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने अमेरिका द्वारा दी जा रही कानूनी और भौतिक सुरक्षा गारंटियों को महत्वपूर्ण प्रगति बताया।
यूरोपीय बयान में यह भी ज़ोर दिया गया कि यूक्रेन की सेना को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलता रहना चाहिए और शांति काल में लगभग 8 लाख सैनिकों की क्षमता बनाए रखी जानी चाहिए। इसके अलावा, किसी भी युद्धविराम की निगरानी और सत्यापन के लिए अमेरिका-नेतृत्व वाले तंत्र का प्रस्ताव रखा गया, ताकि उल्लंघनों का पता लगाया जा सके और संभावित भविष्य के हमलों की समय रहते चेतावनी मिल सके।
नाम न छापने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित समझौते में नाटो के अनुच्छेद पाँच जैसी सुरक्षा आश्वासन शामिल हो सकते हैं, जिसके तहत किसी एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि ये गारंटियाँ अनिश्चित काल तक उपलब्ध नहीं रहेंगी और समय पर समझौता होना ज़रूरी है।
ट्रंप पहले ही यूक्रेन की नाटो सदस्यता से इनकार कर चुके हैं और उन्होंने रूस के उस दृष्टिकोण को भी दोहराया है कि कीव की नाटो में शामिल होने की महत्वाकांक्षा युद्ध के भड़कने का एक कारण बनी। वहीं रूस ने अपनी माँगें फिर दोहराई हैं—जिसमें क्षेत्रीय दावे, यूक्रेन की नाटो सदस्यता पर स्थायी रोक और किसी भी यूरोपीय-नेतृत्व वाले शांति-रक्षक बल का विरोध शामिल है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को बर्लिन में चर्चा किए गए प्रस्तावों को लेकर वॉशिंगटन से और विवरण का इंतज़ार कर रहा है।

