ग्रेटर नोएडा। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS) ने प्रदेश के लाखों मोतियाबिंद मरीजों के लिए बड़ी सौगात का ऐलान किया है। अब GIMS में मोतियाबिंद की जांच, दवाएं और सर्जरी—सब कुछ पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। निजी अस्पतालों में सर्जरी के महंगे खर्च के कारण जो लोग उपचार नहीं करा पाते थे, उन्हें इस सुविधा से सीधी राहत मिलेगी।
GIMS के ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि भारत में अंधेपन का प्रमुख कारण मोतियाबिंद है। देश में लगभग 6.11% लोग दृष्टिबाधित हैं, जिनमें से अधिकतर मामलों के पीछे मोतियाबिंद ही जिम्मेदार है। वहीं उत्तर प्रदेश में 20–25 लाख लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में संस्था ने बड़े स्तर पर मुफ्त सर्जरी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, मोतियाबिंद सर्जरी बेहद प्रभावी उपचार है और 98% से अधिक मरीजों में दृष्टि सामान्य हो जाती है। मरीजों को अब जांच, दवा या ऑपरेशन किसी भी चरण में कोई खर्च नहीं करना होगा।
मोतियाबिंद के मुख्य लक्षण
-
धुंधली या ब्लरी दृष्टि
-
रात में देखने में कठिनाई
-
तेज रोशनी, धूप या हेडलाइट से संवेदनशीलता
-
रोशनी के चारों ओर चमक या प्रभामंडल दिखाई देना
-
रंगों का फीका या पीला दिखना
-
एक आंख से दोहरी छवि
-
बार-बार चश्मे के नंबर में बदलाव
कैसे होता है उपचार?
जब चश्मा या लेंस भी दृष्टि को सुधारने में असफल हो जाए, तब सर्जरी ही अंतिम विकल्प बचता है। यदि मोतियाबिंद से जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होने लगे, तो ऑपरेशन करवाना सबसे उपयुक्त है।
GIMS में निःशुल्क सर्जरी सुविधा शुरू होने से क्षेत्र के हजारों मरीजों को बेहतर इलाज और जीवन में सुधार का अवसर मिलेगा।

