Voter List Revision: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है। यह निर्णय राज्य सरकारों और जिला निर्वाचन अधिकारियों की उस मांग के बाद लिया गया, जिसमें मृतक, स्थानांतरित तथा अनुपस्थित मतदाताओं के पुनः सत्यापन के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता जताई गई थी। नए कार्यक्रम के अनुसार अब मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 फरवरी 2026 को किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) उत्तर प्रदेश नवदीप रिणवा ने गुरुवार को बताया कि राज्य में मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटि-रहित बनाने के लिए आयोग से दो सप्ताह की अतिरिक्त अवधि मांगी गई थी। आयोग ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए SIR की समय सीमा आधिकारिक रूप से आगे बढ़ा दी है।
संशोधित कार्यक्रम में क्या बदला?
नई समय-सारणी के अनुसार मतदाता सूची पुनरीक्षण की सभी प्रमुख प्रक्रियाओं की तिथियों को आगे बढ़ा दिया गया है। इससे न केवल अधिकारियों को पर्याप्त समय मिलेगा, बल्कि मतदाता सूची में मौजूद सभी प्रकार की विसंगतियों को दूर करने का अवसर भी मिलेगा।
संशोधित कार्यक्रम इस प्रकार है:
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गणना अवधि (Enumeration Period): अब 26 दिसंबर 2025 तक
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निर्वाचन नामावलियों का प्रारूप प्रकाशन (Draft Publication): 31 दिसंबर 2025
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दावे एवं आपत्तियों की अवधि:
31 दिसंबर 2025 से 30 जनवरी 2026 तक -
दावे–आपत्तियों का निस्तारण एवं नोटिस चरण:
31 दिसंबर 2025 से 21 फरवरी 2026 तक -
अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन:
28 फरवरी 2026
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार समय सीमा बढ़ने से जिला निर्वाचन अधिकारियों को व्यापक स्तर पर सत्यापन करने का अवसर मिलेगा। विशेष रूप से उन मतदाताओं की पहचान और सत्यापन पर ध्यान दिया जाएगा जो:
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लंबे समय से अनुपस्थित हैं
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किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित हो चुके हैं
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मृतक श्रेणी में आते हैं
इन सभी रिकॉर्ड्स को सही करना ही मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने का प्रमुख उद्देश्य है।
अतिरिक्त समय क्यों ज़रूरी था?
अधिकारियों के अनुसार कई जिलों में सत्यापन प्रक्रिया अत्यधिक समय लेने वाली होती है, क्योंकि टीमों को घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करनी पड़ती है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर त्योहारों, परीक्षाओं और प्रशासनिक व्यस्तताओं के कारण पर्याप्त जनशक्ति की उपलब्धता प्रभावित होती है। ऐसे में पुनरीक्षण प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए समय विस्तार आवश्यक था।
मतदाता सूची की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद
मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सबसे मूलभूत और महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। इसमें त्रुटियां रहने से चुनावों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित होती है। आयोग को उम्मीद है कि बढ़ी हुई समय सीमा से SIR प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और अंतिम मतदाता सूची पहले की तुलना में अधिक सटीक व भरोसेमंद रूप में प्रकाशित होगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जनता से भी अपील की है कि वे अपने नाम, पते और विवरण की जांच अवश्य करें तथा यदि कोई त्रुटि दिखे तो दावा या आपत्ति दर्ज कराएं।

