Diya Aarti method: हिंदू धर्म में आरती केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि भगवान से सीधा आध्यात्मिक जुड़ाव मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आरती में दीपक गलत तरीके से घुमाने पर पूजा अधूरी मानी जाती है? शास्त्रों में दीपक घुमाने का एक निश्चित नियम और क्रम बताया गया है, जिसे अपनाने से ही आरती का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
अक्सर लोग आरती करते समय दीपक को मनचाहे तरीके से घुमा देते हैं, जबकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसकी संख्या और दिशा दोनों बेहद महत्वपूर्ण हैं।
🔔 आरती में दीपक घुमाने का सही नियम
शास्त्रों के अनुसार आरती की शुरुआत हमेशा भगवान के चरणों से करनी चाहिए और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ना चाहिए। यह क्रम भक्त की चेतना को सांसारिकता से अध्यात्म की ओर ले जाने का प्रतीक माना जाता है।
👉 मुख्य नियम:
दीपक घुमाने की संख्या हमेशा विषम होनी चाहिए। इसमें 7 बार दीपक घुमाना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
🪔 भगवान के अंगों के अनुसार दीपक घुमाने की विधि
🔹 चरणों के सामने – 4 बार
चार वेद और चार पुरुषार्थों के प्रति समर्पण भाव दर्शाता है।
🔹 नाभि स्थान पर – 2 बार
सृष्टि की उत्पत्ति और पालन शक्ति का सम्मान प्रकट करता है।
🔹 मुखमंडल के सामने – 1 बार
ईश्वर के निराकार और अनंत स्वरूप की आराधना का प्रतीक है।
🔹 पूरे विग्रह के सामने – 7 बार
अंत में भगवान की पूरी प्रतिमा के सामने दीपक घुमाकर संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी को नमन किया जाता है।
🧘♀️ आरती से पहले और बाद में ये बातें जरूर ध्यान रखें
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आरती शुरू करते समय घंटी बजाना शुभ माना जाता है
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दीपक या कपूर को थाली में रखें
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आरती के बाद दीपक को जमीन पर न रखें
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दीपक की ऊष्मा हाथों से लेकर आंखों और माथे से लगाएं
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अंत में आरती सभी भक्तों में वितरित करें
🙏 क्यों जरूरी है सही विधि से आरती करना?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सही विधि से की गई आरती से
✔ नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
✔ घर में सकारात्मकता आती है
✔ भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है

