Unclaimed Deposits: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य वित्तीय नियामकों की लगातार कोशिशों का असर अब जमीन पर साफ नजर आने लगा है। वर्षों से बैंकों और वित्तीय संस्थानों में पड़ी बिना दावे वाली जमा राशि (Unclaimed Deposits) को उनके असली हकदारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर महीने में ही ग्राहकों को ₹1,043 करोड़ की बिना दावे वाली राशि लौटाई गई, जो अब तक का एक बड़ा मासिक आंकड़ा माना जा रहा है।
यह बढ़ोतरी इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले बिना दावे वाली जमा की वापसी आमतौर पर 100 से 200 करोड़ रुपये प्रति माह के दायरे में ही सीमित रहती थी। अब एक ही महीने में चार से पांच गुना अधिक राशि लौटना यह दिखाता है कि जागरूकता अभियान और डिजिटल प्लेटफॉर्म वास्तव में असरदार साबित हो रहे हैं। आरबीआई के अनुसार, ब्याज सहित देशभर में बैंकों के पास पड़ी कुल बिना दावे वाली जमा राशि करीब ₹85,000 करोड़ के आसपास है।
‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान से बदली तस्वीर
इस बदलाव के पीछे सरकार का दिसंबर में शुरू किया गया ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ नामक देशव्यापी अभियान एक बड़ी वजह माना जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य केवल बैंक जमा ही नहीं, बल्कि बीमा, शेयर, म्यूचुअल फंड, पेंशन और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों को भी उनके सही मालिकों या उत्तराधिकारियों तक पहुंचाना है।
इस पहल में आरबीआई के साथ-साथ सेबी (SEBI), आईआरडीएआई (IRDAI), पीएफआरडीए (PFRDA) और आईईपीएफए (IEPFA) जैसे प्रमुख नियामक शामिल हैं। इन संस्थाओं ने मिलकर लोगों को यह समझाने की कोशिश की कि कई बार जानकारी के अभाव में या दस्तावेजों की कमी के कारण उनकी मेहनत की कमाई वर्षों तक बिना दावे के पड़ी रह जाती है।
तेजी से लौट रही है हजारों करोड़ की रकम
जागरूकता बढ़ने का नतीजा यह हुआ है कि अब तक करीब ₹5,000 करोड़ की बिना दावे वाली राशि सही दावेदारों को लौटाई जा चुकी है। शुरुआती दो महीनों में ही लगभग ₹2,000 करोड़ की रकम वापस की गई, जो इस अभियान की सफलता को दर्शाता है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर में ₹759 करोड़, नवंबर में ₹802 करोड़ और दिसंबर में यह आंकड़ा बढ़कर ₹1,043 करोड़ तक पहुंच गया। लगातार बढ़ती यह रकम इस बात का संकेत है कि जैसे-जैसे लोगों को जानकारी मिल रही है, वे अपनी या अपने परिवार की पुरानी जमा राशियों का दावा कर पा रहे हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म ने आसान बनाया दावा
इस पूरी प्रक्रिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका बेहद अहम रही है। आरबीआई द्वारा लॉन्च किया गया ‘उद्गम (UDGAM) पोर्टल’ लोगों के लिए एक बड़ा सहारा बना है। इस पोर्टल के जरिए कोई भी व्यक्ति एक ही जगह पर अलग-अलग बैंकों में पड़ी अपनी बिना दावे वाली जमा राशि की जानकारी हासिल कर सकता है।
इसी तरह, बीमा से जुड़ी रकम के लिए आईआरडीएआई का ‘बीमा भरोसा’, और शेयर व म्यूचुअल फंड से संबंधित मामलों के लिए सेबी का ‘मित्र’ प्लेटफॉर्म नागरिकों की मदद कर रहे हैं। इन ऑनलाइन माध्यमों ने पहले की जटिल और लंबी प्रक्रिया को काफी हद तक सरल और पारदर्शी बना दिया है।
संसद में भी सामने आए अहम आंकड़े
बिना दावे वाली जमा को लेकर सरकार ने लोकसभा में भी आंकड़े साझा किए हैं। सरकार के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 तक डीईए (DEA) फंड में बिना दावे वाली जमा राशि ₹74,580.25 करोड़ थी। वहीं, उसी वित्त वर्ष में बैंकों द्वारा ₹1,818.19 करोड़ की राशि वापसी और निपटान के लिए जारी की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह जागरूकता अभियान और डिजिटल सुविधाएं जारी रहीं, तो आने वाले समय में हजारों करोड़ रुपये और सही हकदारों तक पहुंच सकते हैं। यह न केवल नागरिकों के लिए राहत की खबर है, बल्कि वित्तीय प्रणाली में भरोसा और पारदर्शिता को भी मजबूत करता है।

