UGC Equity नियमों पर विवाद: कलराज मिश्र ने बताया असंवैधानिक

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UGC Equity Regulations 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 से लागू किए गए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को लेकर देशभर में तीखी बहस शुरू हो गई है। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव, विशेषकर SC/ST/OBC वर्ग के खिलाफ होने वाले भेदभाव को रोकना और समानता को बढ़ावा देना बताया गया है।

हालांकि, इन नए प्रावधानों को लेकर सवर्ण समाज के संगठनों और कई सामाजिक-राजनीतिक समूहों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विरोध करने वालों का कहना है कि ये नियम संतुलन से दूर हैं और एक विशेष वर्ग को संदेह के दायरे में खड़ा करते हैं, जिससे सामाजिक समरसता प्रभावित हो सकती है।

कलराज मिश्र का कड़ा विरोध

पूर्व केंद्रीय मंत्री, उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल और विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष कलराज मिश्र ने UGC के नए नियमों को पूरी तरह असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से इन्हें तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।

कलराज मिश्र का कहना है कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 में निहित समानता, स्वतंत्रता और न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उनके अनुसार, समानता सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन किसी एक सामाजिक वर्ग को संदेह के घेरे में रखकर निगरानी और दंडात्मक व्यवस्था बनाना अनुचित है। इससे शिक्षण संस्थानों में भय और अविश्वास का माहौल बन सकता है।

पुराने नियमों से तुलना

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2012 में लागू UGC नियमों में शिकायत निवारण की प्रक्रिया सभी वर्गों के लिए समान और निष्पक्ष थी। इसके विपरीत, नए नियमों में शिकायत और कार्रवाई की प्रक्रिया एकतरफा नजर आती है।

कलराज मिश्र ने 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि न्यायिक व्यवस्था में निष्पक्ष जांच और निर्दोष की गरिमा की रक्षा को सर्वोपरि माना गया है। यदि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर नियंत्रण नहीं रखा गया, तो शिक्षकों और कर्मचारियों की सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान हो सकता है।

परिषद की प्रमुख मांगें

विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद ने UGC और केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • UGC के Equity Regulations 2026 को तुरंत वापस लिया जाए

  • जाति आधारित एकतरफा दंडात्मक प्रावधान समाप्त किए जाएं

  • शिकायत दर्ज कराने का अधिकार सभी वर्गों को समान रूप से दिया जाए

  • शिकायत निवारण प्रणाली निष्पक्ष, पारदर्शी और संतुलित हो

  • झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान हो

  • शिकायत समितियों में सभी सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया जाए

शिक्षा मंत्री से मुलाकात

कलराज मिश्र के नेतृत्व में परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में सतीश शर्मा, के.के. शर्मा, माधव शर्मा, शरद शर्मा, अरविंद भारद्वाज और हरीश शर्मा सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से आग्रह किया कि नए नियमों की व्यापक समीक्षा की जाए, ताकि समानता के नाम पर किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो और शिक्षा संस्थानों में संतुलन व सौहार्द बना रहे।